कांग्रेस नेता अवनीश काजला हाउस अरेस्ट
मेरठ। दिल्ली एवं देश के विभिन्न राज्यों में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज, पैलेट गन के इस्तेमाल और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के विरोध में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत शनिवार को मेरठ जिला अधिकारी कार्यालय पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गईं। अभियान से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन ने कार्यक्रम को रोकने के लिए शुक्रवार रात से ही कार्रवाई शुरू कर दी और कई पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदर्शन के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे तथा प्रधानमंत्री से देश के छात्रों के प्रति सार्वजनिक माफी की मांग उठाई जानी थी।
संयोजक अवनीश काजला को घर से निकलते ही हिरासत में लेने का आरोप
अभियान के मेरठ संयोजक अवनीश काजला ने आरोप लगाया कि शनिवार सुबह जैसे ही वह अपने आवास से कार्यक्रम के लिए निकले, पुलिस ने उन्हें घेरकर हिरासत में ले लिया। वहीं, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिससे प्रस्तावित प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही बाधित हो गया।
कांवड़ यात्रा का हवाला देकर अनुमति नहीं देने की बात
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पुलिस ने कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और मार्गों पर प्रतिबंध का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। अभियान से जुड़े लोगों का आरोप है कि इसी आधार पर कार्यक्रम को रोकने का प्रयास किया गया।
“लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन”
अवनीश काजला ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना और विरोध-प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उनका आरोप है कि यदि छात्रों की आवाज़ को इस प्रकार बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जाएगा तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के विपरीत होगा।
रंजन शर्मा ने सरकार पर लगाए आरोप
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं पर न्याय की मांग करने वाले लोगों को हिरासत में लेना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, इससे यह संदेश जाता है कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय विरोध की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
‘छात्रों की गूंज’ अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे छात्रों के अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर अपना आंदोलन आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखेंगे। उनका कहना है कि छात्रों की आवाज़ दबाने के हर प्रयास का संवैधानिक दायरे में रहकर विरोध किया जाएगा।