चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित करती उत्तर प्रदेश राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) का 38वां दीक्षांत समारोह बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के मेधावी छात्र-छात्राओं को 199 स्वर्ण, रजत एवं अन्य पदक प्रदान किए गए, जबकि 66,971 उपाधियों को डिजिलॉकर से जोड़ा गया, जिससे विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से अपनी डिग्री उपलब्ध हो सकेगी।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT), हैदराबाद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु शुक्ला तथा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी उपस्थित रहीं। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

राज्यपाल ने किया भवनों का ऑनलाइन लोकार्पण एवं शिलान्यास
समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के विभिन्न नए भवनों का ऑनलाइन लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। साथ ही उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को पुस्तकें भेंट कीं और पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों—मंजू कुमारी, शांति देवी, कमलेश, प्रथमा और सुखबीरी—को आंगनबाड़ी किट वितरित कर सम्मानित किया।
इसके अलावा बुलंदशहर, हापुड़ और गाजियाबाद के जिला एवं पुलिस प्रशासन को बालिकाओं के सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
लोककला और महिला सशक्तिकरण के लिए रसीलाबेन डुंगरिया को मानद डी.लिट्.
समारोह का एक विशेष आकर्षण कच्छ की प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं हस्तशिल्प विशेषज्ञ सुश्री रसीलाबेन कांजीभाई डुंगरिया को डी.लिट्. (मानद) उपाधि से सम्मानित किया जाना रहा। उन्हें ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, भारतीय लोककला को वैश्विक पहचान दिलाने तथा पारंपरिक हस्तशिल्प के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

75 प्रतिशत से अधिक पदक बेटियों ने जीते
अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि इस वर्ष 75 प्रतिशत से अधिक पदक छात्राओं ने प्राप्त किए हैं, जो बेटियों की प्रतिभा, मेहनत और समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने समाज से बेटा-बेटी के बीच भेदभाव समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि हर विद्यार्थी की सफलता के पीछे माता-पिता और गुरुजनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी है।
चौधरी चरण सिंह के आदर्शों पर चलने का आह्वान
राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसान नेता चौधरी चरण सिंह के व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी, ईमानदारी, संघर्ष और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें और किसी भी विचारधारा को अपनाने से पहले उसके उद्देश्य को समझें।
आधुनिक शिक्षा और नवाचार पर दिया विशेष जोर
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से समय की मांग के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एनीमेशन, गेमिंग, अंतरिक्ष विज्ञान, मेडिकल टूरिज्म, स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा 50 गांव गोद लेने, टीबी मुक्त भारत अभियान, NAAC A+ ग्रेड, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रकाशनों तथा शिक्षकों में शोध संस्कृति को बढ़ावा देने जैसे प्रयासों की भी सराहना की।
“विकसित भारत-2047” में युवाओं की होगी अहम भूमिका
मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु शुक्ला ने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास का माध्यम है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है।
उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान, नई तकनीक, अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही साकार होगा।
“डिग्री केवल प्रमाण-पत्र नहीं, जिम्मेदारी का संकल्प”
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि डिग्री केवल एक प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का संकल्प है।
उन्होंने नई शिक्षा नीति, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, कौशल विकास, अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
मेधावी विद्यार्थियों को मिले प्रतिष्ठित पुरस्कार
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने वर्ष 2026 के प्रमुख पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि—
कुलाधिपति स्वर्ण पदक एम.ए. (ड्राइंग एवं पेंटिंग) की छात्रा काजल को प्रदान किया गया।
डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक एलएलएम की छात्रा मुक्ता भारद्वाज को मिला।
चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार बी.एससी. कृषि में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली वर्णिका शर्मा तथा द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली रूचि कुमारी को प्रदान किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
दीक्षांत समारोह के दौरान छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित गीत एवं नाट्य प्रस्तुति देकर उपस्थित अतिथियों की खूब सराहना प्राप्त की। राज्यपाल ने सभी प्रतिभागी छात्राओं को उपहार प्रदान किए। इसके अलावा गोद लिए गए गांवों में आयोजित भाषण, चित्रकला एवं कहानी-कथन प्रतियोगिताओं के विजेता रीतिका, साक्षी और मोनिका को भी सम्मानित किया गया।
गणमान्य अतिथि रहे उपस्थित
समारोह में विधायक गुलाम मोहम्मद (सिवालखास), विधान परिषद सदस्य श्रीचंद शर्मा, जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह, कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र सिंह, विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य, विभिन्न संकायों के डीन एवं प्रोफेसर, अधिकारी, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
38वें दीक्षांत समारोह के माध्यम से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने केवल विद्यार्थियों को डिग्री और सम्मान ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी बोध कराया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के प्रेरक संदेश और विशेषज्ञों के विचारों ने इस समारोह को केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण मंच बना दिया।