छात्रा की मौत को जांच से पहले "आत्महत्या" बताने पर सवाल
मेरठ। IIMT विश्वविद्यालय की छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ को ज्ञापन सौंपकर छात्र-छात्राओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि छात्रा की दुखद और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु से पूरे छात्र समुदाय और समाज में गहरा आक्रोश है। न्याय की मांग को लेकर छात्र-छात्राएं शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके खिलाफ ही आपराधिक मुकदमे दर्ज कर दिए गए।
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में न्याय की मांग कर रहे छात्रों पर मुकदमे दर्ज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह बताया गया है कि संबंधित एफआईआर में छात्रा की मौत को जांच पूरी होने से पहले ही आत्महत्या बताया गया है। ज्ञापन में सवाल उठाया गया है कि जब जांच अभी जारी है तो घटना को पहले से आत्महत्या घोषित करने का आधार क्या है। इस संबंध में संबंधित पुलिसकर्मी की भूमिका और मंशा की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा LIU की महिला हेड कांस्टेबल की डायरी छीने जाने और उसके पन्ने फाड़े जाने के आरोपों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। छात्रों का कहना है कि संबंधित अधिकारी की पहचान स्पष्ट नहीं थी और उन्हें वह विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ा व्यक्ति प्रतीत हुआ था। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। दूसरी, छात्रा की मौत को जांच से पहले आत्महत्या बताने वाले पुलिसकर्मी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। और तीसरी, LIU हेड कांस्टेबल की डायरी फाड़े जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराकर यदि आरोप गलत पाए जाएं तो संबंधित मुकदमों को निरस्त किया जाए।
अब इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें मेरठ पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई और छात्रा की मौत की जांच पर टिकी हुई हैं। न्याय की मांग और पुलिस कार्रवाई के बीच यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।