प्रकृति की सुरक्षा या विकास में बाधा विचार मंथन कार्यक्रम में शामिल छात्राएं, एवं शिक्षिकाएँ
मेरठ। रघुनाथ गर्ल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मेरठ में ‘अरावली संरक्षण : प्रकृति की सुरक्षा या विकास में बाधा’ विषय पर विचार मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी के निर्देशन में वसुधा इको क्लब, वनस्पति विज्ञान विभाग तथा जागरूक नागरिक संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अरावली पर्वतमाला के पर्यावरणीय और भौगोलिक महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
निबंध लेखन प्रतियोगिता में विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम की श्रृंखला में 7 सितंबर 2026 को निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों से विषय पर लिखित प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। इसमें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ, शोभित विश्वविद्यालय मेरठ, एनएएस कॉलेज मेरठ, मेरठ कॉलेज, कुमारी मायावती गवर्नमेंट गर्ल्स पीजी कॉलेज बादलपुर तथा महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रविष्टियां भेजीं। प्रतियोगिता में लगभग 53 प्रतिभागियों ने लिखित प्रविष्टियां प्रस्तुत कीं।
ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन में पर्यावरण संरक्षण पर हुआ मंथन
इसी क्रम में 11 सितंबर 2026 को ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अरावली पर्वतमाला के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तथा विकास की अवधारणा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर स्वतंत्र रूप से विचार रखने का अवसर प्रदान करना था।
निबंध लेखन प्रतियोगिता की संयोजिका वनस्पति विज्ञान विभाग की इंचार्ज प्रो. अमिता शर्मा रहीं, जबकि आयोजन सचिव के रूप में प्रो. रजनी श्रीवास्तव और डॉ. गीता सिंह ने जिम्मेदारी निभाई।
जागरूक नागरिक संगठन और वसुधा इको क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन
11 सितंबर को आयोजित ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन में नगर की संस्था जागरूक नागरिक संगठन तथा रघुनाथ गर्ल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वसुधा इको क्लब की संयुक्त भागीदारी रही। कार्यक्रम की संरक्षक महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी रहीं। अध्यक्षता जागरूक नागरिक एसोसिएशन के महासचिव गिरीश शुक्ला ने की। संस्था के समन्वयक डॉ. ए.के. शुक्ला और डॉ. एस.पी. सिंह के साथ कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. अमिता शर्मा तथा आयोजन सचिव सुश्री शैल वर्मा भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन भूगोल विभाग की इंचार्ज सुश्री शैल वर्मा ने किया।
अरावली के अंधाधुंध दोहन पर प्रो. अमिता शर्मा ने जताई चिंता
कार्यक्रम में प्रो. अमिता शर्मा ने अरावली पर्वत श्रृंखला के वर्तमान स्वरूप, इसके प्राकृतिक महत्व और हो रहे दोहन पर प्रकाश डाला। उन्होंने अरावली के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की और इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बिना दीर्घकालिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
गिरीश शुक्ला ने अरावली को बताया प्रकृति की महत्वपूर्ण धरोहर
जागरूक नागरिक संगठन के महासचिव गिरीश शुक्ला ने प्राचीन भारतीय परंपरा में प्रकृति पूजन की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए अरावली पर्वत को ‘मां’ का संबोधन दिया। उन्होंने अरावली के भौगोलिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वर्तमान में चल रही खनन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की प्रक्रिया पर चिंता एवं रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रकृति की अनदेखी मानव अस्तित्व के लिए बन सकती है चुनौती
जागरूक नागरिक संगठन के समन्वयक डॉ. ए.के. शुक्ला ने भारतीय परंपरा में प्रकृति संरक्षण की अवधारणा पर चर्चा की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को प्रकृति के प्राचीन संरक्षकों में से एक बताते हुए अरावली के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने निकट भविष्य में मरुस्थलीकरण की संभावनाओं को लेकर चिंता जताई और कहा कि मानव को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि मानव का अस्तित्व प्रकृति पर निर्भर है और प्रकृति की निरंतर अनदेखी भविष्य में मानव अस्तित्व के लिए संकट पैदा कर सकती है।
विद्यार्थियों ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर रखे विचार
ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन में छात्रा दानिया ने अरावली के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करते हुए प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की आवश्यकता पर विचार रखा। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के वास्तविक मूल्य और विकास की कीमत के बीच तुलना करते हुए पर्यावरण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कुमारी मायावती गवर्नमेंट गर्ल्स पीजी कॉलेज, बादलपुर की छात्रा मीनाक्षी तोमर ने ‘अरावली बचाओ आंदोलन की शुरुआत क्यों और कैसे हुई’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने अरावली के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह पर्वतमाला प्राकृतिक जल एवं वायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अरावली को प्राकृतिक वाटर फिल्टर और एयर फिल्टर के रूप में इसकी भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
बीकॉम की छात्रा मिस्कत ने विकास और पर्यावरण के संबंध पर विचार रखते हुए कहा कि प्रकृति के दोहन की कीमत पर होने वाला विकास वास्तविक अर्थों में टिकाऊ विकास नहीं हो सकता। उन्होंने “इकोलॉजी इज द परमानेंट इकॉनॉमी” की अवधारणा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने इतिहास में प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से उत्पन्न संकटों के उदाहरणों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों पर जताई चिंता
डॉ. एस.पी. सिंह ने प्रकृति के अनियंत्रित दोहन के परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाओं की पुनरावृत्ति और उनसे होने वाले नुकसान पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अरावली जैसी प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति मानव समाज की पोषक है, लेकिन यदि मानव विकास की दौड़ में प्रकृति का शोषण करता रहा तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
निर्णायक मंडल ने किया प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन
विचार मंथन एवं प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मेरठ कॉलेज के भूगोल विभाग की प्रभारी प्रो. अनीता मलिक, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की डॉ. शैरी चौधरी तथा रघुनाथ गर्ल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय की डॉ. मनीषा सिंघल शामिल रहीं। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत विचारों, विषय की समझ और पर्यावरणीय मुद्दों पर उनकी दृष्टि का मूल्यांकन किया।
निबंध लेखन में अंजलि यादव रहीं प्रथम
विचार मंथन कार्यक्रम के तहत आयोजित आर्टिकल राइटिंग प्रतियोगिता में शोभित विश्वविद्यालय की अंजलि यादव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कीर्ति रावत ने द्वितीय तथा हिमांशी भड़ाना ने तृतीय स्थान हासिल किया। वहीं 11 सितंबर को आयोजित ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन में कुमारी मायावती गवर्नमेंट गर्ल्स पीजी कॉलेज, बादलपुर की छात्रा मीनाक्षी ने प्रथम तथा रघुनाथ गर्ल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मेरठ की छात्रा दानिया ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित जागरूक नागरिक संगठन के पदाधिकारियों तथा निर्णायक मंडल के सदस्यों ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर समझौते का नवीनीकरण
कार्यक्रम के दौरान वसुधा इको क्लब, रघुनाथ गर्ल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय और जागरूक नागरिक एसोसिएशन के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर पूर्व में किए गए अनुबंध का नवीनीकरण भी किया गया। दोनों संस्थाओं की ओर से भविष्य में पर्यावरण संरक्षण, जागरूकता और विद्यार्थियों की सहभागिता से जुड़े कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने पर जोर दिया गया।
जागरूक नागरिक संगठन के महासचिव गिरीश शुक्ला ने इस सहयोग को लेकर उत्साह और प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कहा कि अरावली जैसी प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल किसी एक संस्था या वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने और उन्हें प्रकृति संरक्षण से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाएंगे।