अमरदीप और रविता, जिन्हें अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
मेरठ। बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव के चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। दोनों को 7 अक्टूबर को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया गया था। अभियोजन के अनुसार, अमित की हत्या के बाद उसके शव के पास जिंदा सांप छोड़ दिया गया था, ताकि मौत को सर्पदंश का हादसा बताया जा सके। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने से दम घुटने की बात सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-12 की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई में 86 तारीखें लगीं और अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सक की गवाही और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों को मुकदमे में अहम माना गया।
अमित के घर आने-जाने से हुई अमरदीप की पहचान
अमित कश्यप अकबरपुर सादात गांव में टाइल और पत्थर लगाने का काम करता था। अमरदीप भी उसके साथ काम करता था और उसका परिचित था। वह अमित के घर आता-जाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात अमित की पत्नी रविता से हुई। पुलिस जांच और मुकदमे की रिपोर्टों में दोनों के बीच संबंध होने की बात सामने आई। बताया गया कि जब अमित को उनके संबंधों की जानकारी हुई, तो घर में विवाद बढ़ने लगा।

मीडिया में आई पुलिस पूछताछ से जुड़ी खबरों में अमरदीप के हवाले से बताया गया कि वह काम के सिलसिले में अमित के संपर्क में आया था और उसके घर जाने के दौरान रविता से परिचय हुआ। हालांकि, उनके संबंध कब और कितने समय में गहरे हुए, इसे लेकर अलग-अलग खबरों में अलग-अलग विवरण प्रकाशित हुए हैं। इसलिए इस मामले की पुख्ता समयरेखा अदालत में पेश साक्ष्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही देखी जानी चाहिए।
मंदिर से लौटने के बाद हत्या की साजिश का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, 12 अप्रैल 2025 को रविता, अमित और उनके बच्चे सहारनपुर स्थित माता शाकंभरी देवी मंदिर गए थे। लौटने के बाद रात में अमित घर पर सो गया। आरोप था कि इसी रात रविता ने अमरदीप को घर बुलाया। दोनों ने मिलकर अमित की हत्या की और वारदात को सर्पदंश बताने की योजना के तहत शव के पास सांप छोड़ दिया।
अदालत में पेश अभियोजन के मामले के अनुसार, रविता ने अमित के हाथ पकड़े और अमरदीप ने उसका गला दबाया। इसके बाद शव के पास घोड़ापछाड़ सांप छोड़ा गया। सांप के शरीर के नीचे दबने से अमित के शरीर पर काटने के निशान भी आए। इन निशानों के कारण शुरुआत में परिवार को मौत सर्पदंश से होने की बात सच लगी। पुलिस और अदालत में पेश किए गए विवरणों के मुताबिक, सांप की व्यवस्था एक सपेरे से की गई थी।
बिस्तर पर मिला शव, पास में था जिंदा सांप
13 अप्रैल की सुबह अमित का शव बिस्तर पर मिला। उसके पास सांप देखकर परिवार में हड़कंप मच गया। रविता ने बताया कि अमित को सांप ने काट लिया है। परिवार ने शुरुआत में इसे सर्पदंश से हुई मौत माना। कुछ खबरों के अनुसार, शव को झाड़-फूंक के लिए भी ले जाया गया और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे।

इसी दौरान पुलिस गांव पहुंची। परिवार और रविता की ओर से पोस्टमार्टम कराने पर आपत्ति किए जाने की बात भी रिपोर्टों में आई, लेकिन पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। जांच के लिए यह कदम निर्णायक साबित हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सांप का काटना नहीं, बल्कि गला दबने से दम घुटना बताया गया। रिपोर्ट और चिकित्सकीय साक्ष्यों से हत्या का संदेह मजबूत हुआ और पुलिस ने मामले की जांच उसी दिशा में आगे बढ़ाई।
पूछताछ और साक्ष्यों से खुली परतें
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने रविता और अमरदीप से पूछताछ की। जांच में उनके बीच संपर्क और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल की गई। अभियोजन ने अदालत में पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, विवेचक, सपेरे और अन्य गवाहों के बयान पेश किए। सपेरे की गवाही और सांप की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी मामले में सामने आई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद दोनों को दोषी ठहराया।
मामले में अमित के भाई की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया और मुकदमा अदालत में चला। अभियोजन ने हत्या और साजिश के आरोपों को साबित करने के लिए गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों पर भरोसा किया। अदालत ने 7 अक्टूबर को रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई और 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।
फैसले के बाद परिवार ने जताया संतोष
सजा सुनाए जाने के बाद अमित की मां मुनेश और भाई सोनू ने फैसले पर संतोष जताया। परिवार ने कहा कि उन्हें अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद थी। मां ने कहा कि बेटे की हत्या के बाद परिवार लंबे समय से पीड़ा में था और फैसले से उन्हें कुछ राहत मिली है। उन्होंने दोषियों को मिली सजा पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें विश्वास था कि अदालत उनके साथ न्याय करेगी।
मुनेश ने यह भी कहा कि अमित के तीन बच्चे हैं और अब उनकी परवरिश की जिम्मेदारी वह खुद उठाएंगी। उनके अनुसार, परिस्थितियां कैसी भी हों, वह अपने पोते-पोतियों को पालने की पूरी कोशिश करेंगी। बेटे की मौत के बाद बच्चों के भविष्य को लेकर परिवार पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
अमित के भाई सोनू ने कहा कि उनका भाई निर्दोष था और उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने अदालत के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि परिवार ने अमित को न्याय दिलाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। परिवार के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि इस फैसले से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है।
बचाव पक्ष अपील करेगा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बचाव पक्ष ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है। ऐसे में मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। अदालत के फैसले ने उस हत्या का सच सामने रखा, जिसे शुरुआती तौर पर सर्पदंश की घटना बताने की कोशिश की गई थी। इस मामले में पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय साक्ष्य जांच की दिशा बदलने और मुकदमे में अहम साबित हुए।