राज्यसभा सांसद डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेई
नौ दरवाजों के भीतर बसे पुराने शहर के लिए स्पष्ट सीमा, मिश्रित भू-उपयोग और पार्किंग व्यवस्था की मांग
मेरठ । मेरठ के प्राचीन निर्मित शहर के व्यवस्थित विकास और वहां रहने वाले लोगों तथा कारोबारियों की समस्याओं को लेकर राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के अध्यक्ष को पत्र भेजा है। 11 अक्टूबर 2026 को लिखे पत्र में उन्होंने प्राधिकरण की 131वीं बोर्ड बैठक में पुराने शहर से जुड़े विषयों पर विचार करने का अनुरोध किया है। प्रस्ताव में शहर की सीमा तय करने, बाजार और आवासीय क्षेत्रों की पहचान, भवन निर्माण नियमों के व्यावहारिक अनुप्रयोग, पार्किंग तथा अग्नि सुरक्षा के लिए कई सुझाव दिए गए हैं।
ऐतिहासिक शहर में व्यापार और आवास साथ-साथ
पत्र के अनुसार, मेरठ का प्राचीन निर्मित शहर ऐतिहासिक रूप से नौ दरवाजों के भीतर बसा है। यहां लंबे समय से व्यापारिक और आवासीय गतिविधियां साथ-साथ चलती रही हैं। सांसद ने पत्र में कहा है कि व्यापारी और निवासी, दोनों इस शहर की पहचान और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। इसलिए पुराने शहर के विकास और नियमन में दोनों के हितों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
पत्र में MDA के गठन और नियमावली का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्राधिकरण का गठन 1976 में हुआ था और पहली नियमावली 1982 में बनी थी। प्रस्ताव में यह मुद्दा उठाया गया है कि नियमावली में पुराने शहर के किसी हिस्से पर पूर्वगामी प्रभाव लागू होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसी संदर्भ में सांसद ने क्षेत्र के व्यवस्थित विकास के लिए बोर्ड के सामने विचारार्थ सुझाव रखे हैं।
प्राचीन शहर की सीमा तय करने और सर्वे कराने का सुझाव
प्रस्ताव में कहा गया है कि पुराने शहर की सीमा नौ ऐतिहासिक दरवाजों, राजस्व मानचित्रों और नगर निगम के वार्डों की सीमाओं के आधार पर स्पष्ट की जाए। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि पुराने शहर के लिए बनाई जाने वाली विशेष व्यवस्था किस क्षेत्र में लागू होगी।
इसके साथ ही MDA और नगर निगम की संयुक्त टीम से क्षेत्र का जमीनी सर्वेक्षण कराने का सुझाव दिया गया है। सर्वे में यह पहचानने की बात कही गई है कि कौन-से मार्ग मुख्य बाजार या सघन बाजार क्षेत्र हैं और कौन-से हिस्से मुख्य रूप से आवासीय हैं। पत्र में बाजार मार्गों को “अधिसूचित बाजार मार्ग” के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
मिश्रित भू-उपयोग को मान्यता देने की मांग
प्रस्ताव के मुताबिक, पुराने शहर में आवास और व्यापार का उपयोग लंबे समय से एक साथ होता रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए इसे स्वाभाविक मिश्रित भू-उपयोग क्षेत्र के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था से निवासियों और व्यापारियों, दोनों के अधिकारों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
संकरी गलियों में भवन नियमों का व्यावहारिक अनुप्रयोग
पत्र में बताया गया है कि पुराने शहर की कई गलियां लगभग दो से चार मीटर चौड़ी हैं। ऐसे क्षेत्र में निर्माण से जुड़े नियमों को लागू करते समय संरचनात्मक सुरक्षा, वेंटिलेशन और प्रकाश जैसे सुरक्षा मानकों का ध्यान रखने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव में वैध नक्शा स्वीकृति को प्रोत्साहित करने और बिना नक्शे के होने वाले असुरक्षित निर्माण पर रोक लगाने की बात कही गई है।
नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का भी सुझाव है, ताकि वैध निर्माण कराने वाले नागरिकों को अनावश्यक दबाव या भ्रष्टाचार का सामना न करना पड़े। पत्र में पुराने फायर हाइड्रेंटों को भी पुनर्जीवित करने की जरूरत बताई गई है। प्रस्ताव के अनुसार, पहले कई गलियों और मोड़ों पर मौजूद फायर हाइड्रेंट सड़क निर्माण के दौरान नीचे दब गए। उन्हें फिर से उपयोगी बनाकर आग लगने की स्थिति में मदद ली जा सकती है।
सामुदायिक पार्किंग और बाजार तक ई-रिक्शा सुविधा
पुराने शहर में छोटे भूखंडों पर व्यक्तिगत पार्किंग बनाना कठिन बताया गया है। इस समस्या के समाधान के लिए पत्र में सामुदायिक पार्किंग की अवधारणा लागू करने का सुझाव दिया गया है। नौ दरवाजों के बाहर उपलब्ध सरकारी या प्राधिकरण की भूमि पर पार्किंग स्थल विकसित कर वहां से बाजार तक ई-रिक्शा और पैदल आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
पत्र में वर्ष 2015 की बोर्ड बैठक से जुड़ी पार्किंग संबंधी कार्यवाही का भी उल्लेख है। इसके अनुसार, 10 सितंबर 2015 को हुई 106वीं बोर्ड बैठक में गठित समिति को एक माह में रिपोर्ट देनी थी। समिति की 3 नवंबर 2015 की बैठक की कार्यवाही 16 नवंबर 2015 को जारी हुई थी। उसमें दो विकल्पों का उल्लेख किया गया: प्राधिकरण करीब 1,000 वर्गमीटर भूमि पर पार्किंग प्लाजा विकसित करे, या कोई व्यक्ति अपना भूखंड प्राधिकरण को बेच दे और प्राधिकरण वहां पार्किंग प्लाजा बनाए।
आग से बचाव के लिए अलग कार्ययोजना का सुझाव
प्रस्ताव में कहा गया है कि संकरी गलियों में बड़े अग्निशमन वाहनों का पहुंचना संभव नहीं है। इसलिए अग्निशमन विभाग के परामर्श से पुराने शहर के लिए अलग कार्ययोजना बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें छोटे अग्निशमन वाहन, प्रमुख बाजारों में फायर हाइड्रेंट और प्रत्येक प्रतिष्ठान में अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था शामिल है।
इसके अलावा वार्षिक फायर ऑडिट तथा व्यापारियों और निवासियों के लिए जागरूकता प्रशिक्षण कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि आपात स्थिति में लोग समय रहते सुरक्षा उपाय कर सकें।
बोर्ड प्रस्तावों को कानूनी पक्ष के साथ प्रस्तुत करने की मांग
पत्र के अंतिम हिस्से में सांसद ने पुराने शहर, संकरी गलियों और लंबे समय से बने भवनों से जुड़े मामलों को कानूनी पक्ष के साथ संबंधित मंच पर रखने का सुझाव दिया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बोर्ड के अंतिम नीतिगत निर्णय तक, जहां नागरिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप वैध निर्माण के लिए आवेदन करें, वहां नियमों के अनुसार यथासंभव सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए।
डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने MDA अध्यक्ष से आग्रह किया है कि पुराने शहर के व्यापारियों और निवासियों के हित में इन सुझावों पर बोर्ड बैठक में गंभीरता से विचार किया जाए। ये बिंदु पत्र में विचारार्थ प्रस्ताव के रूप में रखे गए हैं।