पंचकूला में 420वें शहीदी दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम,
पंचकूला। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचम पातशाह का बलिदान भारतीय इतिहास में सत्य, धर्म, मानवता और आध्यात्मिक शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उनका जीवन और शहादत अन्याय, अत्याचार तथा असत्य के विरुद्ध डटकर खड़े रहने की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री गुरुवार को पंचकूला में गुरु अर्जन देव जी के 420वें शहीदी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर गुरु अर्जन देव जी के जीवन एवं उनके महान योगदान पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं के बीच छबील सेवा कर गुरु परंपरा के सेवा भाव का संदेश दिया। कार्यक्रम में हरियाणा और पंजाब से बड़ी संख्या में संत-महापुरुष, धार्मिक नेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना के तहत हुआ आयोजन
हरियाणा सरकार द्वारा ‘संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री माता मनसा देवी और श्री नाडा साहिब की पावन धरती पर आयोजित इस आयोजन में उपस्थित होकर वे स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। उन्होंने गुरु अर्जन देव जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान केवल सिख समाज की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का इतिहास त्याग, तपस्या, बलिदान और आध्यात्मिक पराक्रम की गौरवशाली परंपराओं से भरा हुआ है। जब-जब देश, धर्म, संस्कृति और मानवता पर संकट आया, तब-तब गुरुओं और संतों ने अपने बलिदान से सत्य और धर्म की रक्षा की। गुरु अर्जन देव जी की शहादत इसी महान परंपरा का सर्वोच्च उदाहरण है।
सामाजिक समरसता और मानवता के प्रतीक थे गुरु अर्जन देव
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने समाज को जोड़ने और मानवता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया। उन्होंने अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब की स्थापना कर उसके चारों दिशाओं में चार द्वार बनवाए, जो सभी जाति, वर्ग और धर्मों के लोगों के लिए समान रूप से खुले होने का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने सदियों पहले ही सामाजिक समरसता, समानता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को साकार रूप दिया। गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर, संत नामदेव, बाबा फरीद और संत रविदास सहित अनेक संतों की वाणी को संकलित कर उन्होंने भारत की विविधता को एकता के सूत्र में बांधने का अद्भुत कार्य किया।
शहादत का संदेश: सत्य के लिए कभी समझौता नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदी दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुगल शासक जहांगीर गुरु अर्जन देव जी के बढ़ते प्रभाव और आध्यात्मिक जागरण से भयभीत हो गया था। इसके बाद उन्हें लाहौर में बंदी बनाकर अमानवीय यातनाएं दी गईं।
उन्होंने कहा कि तपती तवी पर बैठाना, शरीर पर गर्म रेत डालना और असहनीय यातनाएं देना अत्याचार की पराकाष्ठा थी, लेकिन गुरु साहिब ने अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने ‘तेरा किया मीठा लागे’ का उच्चारण करते हुए परमात्मा की इच्छा को स्वीकार किया। यह घटना केवल शहादत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक धैर्य, आत्मबल और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का सर्वोच्च उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी का बलिदान हमें सिखाता है कि सत्य, न्याय और संस्कृति की रक्षा के लिए किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं करना चाहिए।
विकसित भारत के निर्माण में गुरु साहिब की शिक्षाएं मार्गदर्शक
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब गुरु अर्जन देव जी की शिक्षाएं हमारे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने सेवा, समानता, करुणा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र भी इसी भावना से प्रेरित है। समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा ही सच्चा धर्म है और लंगर परंपरा हमें समानता एवं मानवता का संदेश देती है।
सिख इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार सिख गुरुओं के इतिहास और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने आठवीं कक्षा के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं के इतिहास को शामिल किया है। अब विद्यार्थी बाबा बंदा सिंह बहादुर के त्याग, बलिदान और आदर्शों का भी अध्ययन करेंगे।
उन्होंने बताया कि श्री हजूर साहिब नांदेड़ की यात्रा के लिए विशेष रेलगाड़ियों का संचालन किया गया है। इसके अलावा वर्ष 1984 के दंगा प्रभावित 121 परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान भी किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरसा स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चिल्ला साहिब की लगभग नौ एकड़ भूमि बिना किसी शुल्क के गुरुद्वारा साहिब के नाम हस्तांतरित की गई है। वहीं यमुनानगर में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का नाम श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी के नाम पर रखा गया है।
युवाओं से इतिहास और विरासत को जानने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे सिख गुरुओं के गौरवशाली इतिहास और बलिदानों से प्रेरणा लें। जब युवा अपनी विरासत और इतिहास को जानेंगे, तभी उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
उन्होंने गुरु अर्जन देव जी के बताए सत्य, सेवा, करुणा और सिमरन के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि यही गुरु साहिब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही समाज में शांति, सद्भाव एवं भाईचारे को मजबूत करने का सबसे प्रभावी मार्ग है।
कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार जगदीश सिंह झींडा, विधायक धनेश अदलखा, ज्ञानी हरप्रीत सिंह सहित अनेक संत-महापुरुष, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।