धू-धू कर जलती बस
मेरठ। मेरठ के भैंसाली रोडवेज डिपो में गुरुवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया, जब हरिद्वार से लौटकर खड़ी एक रोडवेज बस में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बस के अंदर सो रहे चालक और परिचालक आग की लपटों के बीच फंस गए। दोनों ने सूझबूझ दिखाते हुए खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर छलांग लगाई और अपनी जान बचाई। देखते ही देखते आग ने पास में खड़ी दूसरी बस को भी चपेट में ले लिया। इस हादसे में दो बसें पूरी तरह जलकर खाक हो गईं, जबकि तीसरी बस को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है।
रात दो बजे हरिद्वार से लौटी थी बस
जानकारी के अनुसार भैंसाली डिपो की रोडवेज बस संख्या UP78FT1789 बुधवार देर रात हरिद्वार से मेरठ लौटी थी। बस पर मोदीनगर निवासी चालक बबली और बागपत रोड निवासी परिचालक अरुण तैनात थे। दोनों ने यात्रियों को उतारने के बाद बस को डिपो में खड़ा किया और आराम करने के लिए बस के अंदर ही सो गए।
रात करीब तीन बजे अचानक परिचालक अरुण की नींद खुली तो उसने बस के अगले हिस्से से उठती आग की लपटें देखीं। उसने तुरंत चालक बबली को जगाया। दोनों ने देखा कि बस के फ्रंट हिस्से में तेजी से आग फैल रही है।
खिड़की का शीशा तोड़कर बचाई जान
आग बढ़ती देख चालक और परिचालक ने मदद के लिए शोर मचाया, लेकिन तब तक आग पूरे बस में फैलने लगी थी। जान बचाने के लिए दोनों बस के पिछले हिस्से की ओर भागे और खिड़की का शीशा तोड़ने का प्रयास किया।
काफी मशक्कत के बाद शीशा टूटने पर दोनों बाहर कूद गए और अपनी जान बचाने में सफल रहे। यदि कुछ मिनट की भी देरी हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
दूसरी बस भी आग की चपेट में आई
आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही देर में पूरी बस आग का गोला बन गई। पास में खड़ी रोडवेज की अनुबंधित बस UP15FT1789 भी आग की चपेट में आ गई। दोनों बसों से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं और पूरे डिपो में अफरा-तफरी मच गई।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। कुछ लोगों ने आग का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।
दमकल विभाग ने आधे घंटे में पाया काबू
सूचना मिलने पर दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।
हालांकि तब तक दो बसें पूरी तरह जल चुकी थीं। आग की लपटें तीसरी बस तक भी पहुंचीं, लेकिन समय रहते आग पर नियंत्रण पा लेने के कारण उसे सीमित नुकसान हुआ। अधिकारियों के अनुसार तीसरी बस का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावित हुआ है।
ई-टिकटिंग मशीन और नकदी भी जली
हादसे में चालक और परिचालक को अपना सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। आग में बस के अंदर रखी ई-टिकटिंग मशीन (ETM), नकदी से भरा बैग, कपड़े और अन्य आवश्यक सामान जलकर राख हो गया।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। जली हुई बसों को निरीक्षण के लिए डिपो परिसर में सुरक्षित स्थान पर खड़ा किया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो में आग की भयावह लपटें, डिपो में मौजूद लोगों की भीड़ और दमकल कर्मियों द्वारा आग बुझाने का प्रयास स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में दूसरी बस को भी अपनी चपेट में ले लिया। बताया जा रहा है कि प्रभावित बसों में से एक सीएनजी फिटेड बस भी थी, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
शॉर्ट सर्किट या साजिश? जांच शुरू
प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। जिस बस में आग लगी वह लगभग आधा घंटा पहले ही हरिद्वार से लौटकर डिपो में खड़ी की गई थी।
अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल के आसपास कोई विद्युत लाइन भी नहीं थी। ऐसे में बंद खड़ी बस में अचानक आग कैसे लगी, इसकी गहन जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां इस पहलू पर भी काम कर रही हैं कि कहीं किसी शरारती तत्व ने जानबूझकर आग तो नहीं लगाई। क्योंकि घटना के समय बस अड्डे पर काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
बड़ी दुर्घटना टलने से राहत
इस हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि बस के अंदर सो रहे चालक और परिचालक समय रहते बाहर निकल आए। यदि उनकी नींद कुछ देर और नहीं खुलती तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।
फिलहाल परिवहन विभाग, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी टीमों की भी मदद ली जा रही है।