इंडियन ओवरसीज बैंक के रीजनल ऑफिस मेरठ में आयोजित साइबर जागरूकता कार्यक्रम में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को ऑनलाइन ठगी से बचाव की जानकारी देते साइबर सेल के पुलिसकर्मी।
मेरठ। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेश और पुलिस अधीक्षक अपराध के निर्देशन में 30 अक्टूबर 2026 को इंडियन ओवरसीज बैंक के रीजनल ऑफिस में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। साइबर सेल की टीम ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को ऑनलाइन ठगी के विभिन्न तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार पाण्डेय, उपनिरीक्षक नितिन पाण्डेय, उपनिरीक्षक निर्मल सती और हेड कांस्टेबल मोहित ने डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश, साइबर स्लेवरी और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी के बारे में बताया। टीम ने समझाया कि साइबर अपराधी लोगों को डराकर, लालच देकर या उनकी पहचान का दुरुपयोग कर उनसे पैसे और गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंकिंग पासवर्ड साझा न करने की सलाह
बैंककर्मियों को अनजान लिंक पर क्लिक न करने और संदिग्ध क्यूआर कोड स्कैन करने से बचने की सलाह दी गई। पुलिस टीम ने कहा कि किसी के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड का सीवीवी नंबर या बैंकिंग पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए। अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने या फोन का रिमोट एक्सेस देने से भी बचने की अपील की गई।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
पुलिस टीम ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय रहते शिकायत करने से ठगी में इस्तेमाल हुए बैंक खाते या लेनदेन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
कार्यक्रम का उद्देश्य बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराध के नए तरीकों के प्रति सतर्क करना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के प्रति जागरूक करना था।