डायबिटीज़ एवं ओरल हेल्थ कार्यक्रम को संबोधित करते प्राचार्य आर सी गुप्ता
मेरठ। एल.एल.आर.एम. मेडिकल कॉलेज, मेरठ के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग द्वारा Diabetes India, Oral Health तथा UPRSSDI के सहयोग से ‘डायबिटीज एवं ओरल हेल्थ’ विषय पर सीएमई (CME) एवं Professional Enhancement Series का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मधुमेह और मौखिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों के प्रति चिकित्सकों, मेडिकल विद्यार्थियों एवं आमजन में जागरूकता बढ़ाना तथा मधुमेह के उपचार और उससे जुड़ी जटिलताओं के संबंध में नवीनतम चिकित्सा जानकारी का आदान-प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संध्या गौतम ने की, जबकि डॉ. स्नेहलता वर्मा आयोजन सचिव और डॉ. श्वेता शर्मा आयोजन सह-सचिव के रूप में शामिल रहीं।
प्राचार्य सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता, उप-प्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक, एसआईसी डॉ. धीरज राज तथा सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी द्वारा किया गया।
प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर आयोजकों एवं प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में इस प्रकार की सीएमई नियमित रूप से आयोजित होती रहनी चाहिए, ताकि चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों के ज्ञान में निरंतर वृद्धि हो और समाज में विभिन्न रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
उन्होंने मधुमेह को गंभीर एवं दीर्घकालिक बीमारी बताते हुए समय पर जांच, उचित उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
मधुमेह का प्रभाव शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है
उप-प्राचार्य डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक ने कहा कि मधुमेह एक गंभीर और जटिल बीमारी है, जिसका प्रभाव शरीर के लगभग सभी अंगों पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि अनियंत्रित रक्त शर्करा का हृदय, गुर्दे, आंखों, नसों के साथ-साथ मौखिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार को आवश्यक बताया।
मधुमेह रोगियों में ओरल हेल्थ पर विशेष ध्यान जरूरी
एसआईसी डॉ. धीरज राज ने कहा कि मधुमेह के मरीजों में मौखिक स्वास्थ्य का विशेष महत्व है। अनियंत्रित मधुमेह की स्थिति में मसूड़ों और दांतों से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ओरल इंफेक्शन का प्रभाव मरीज के समग्र स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि मधुमेह से पीड़ित मरीजों के उपचार में नियमित दंत परीक्षण और उचित मौखिक स्वच्छता को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से मधुमेह की रोकथाम, समय पर जांच, उपचार और उससे जुड़ी जटिलताओं के संबंध में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने चिकित्सकों के साथ-साथ आमजन तक स्वास्थ्य संबंधी सही और उपयोगी जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘Should Diabetic Patients Undergo Dental Screening?’ पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की आयोजन अध्यक्ष डॉ. संध्या गौतम ने ‘Should Diabetic Patients Undergo Dental Screening?’ विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि मधुमेह रोगियों में नियमित दंत एवं मौखिक स्वास्थ्य जांच से ओरल समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार संभव है।
उन्होंने मधुमेह और ओरल हेल्थ के बीच द्विपक्षीय संबंध को समझने तथा चिकित्सकीय और दंत चिकित्सा सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
पेरियोडॉन्टाइटिस को लेकर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
प्रो. डॉ. आभा गुप्ता ने ‘Periodontitis – 6th Complication of Diabetes’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मधुमेह के मरीजों में पेरियोडॉन्टाइटिस के बढ़ते जोखिम तथा दोनों बीमारियों के बीच पारस्परिक प्रभाव की जानकारी दी।
प्रो. डॉ. श्वेता शर्मा, को-सेक्रेटरी, ने ‘Diabetes – Oral Reflections’ विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि मधुमेह के विभिन्न प्रभाव मौखिक स्वास्थ्य में भी दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि ओरल हेल्थ की स्थिति कई मामलों में रोगी के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती है।
वहीं आयोजन सचिव सह-आचार्य डॉ. स्नेहलता वर्मा ने ‘Diabetes and Periodontitis – What Are the Pathomechanistic Links?’ विषय पर मधुमेह और पेरियोडॉन्टाइटिस के बीच विभिन्न पैथोमैकेनिस्टिक संबंधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
दंत चिकित्सकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
प्रो. डॉ. अनामिका शर्मा, पेरियोडॉन्टिस्ट, ने ‘Should Dental Patients Undergo Diabetic Screening?’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि दंत चिकित्सकों की भूमिका केवल मौखिक रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि संदिग्ध मरीजों में मधुमेह की स्क्रीनिंग की पहचान और आवश्यकता पड़ने पर उचित रेफरल में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
डॉ. आयुषी सिंघल ने ‘What’s New in the Management of Diabetes’ विषय पर मधुमेह के उपचार में हुए नवीनतम एडवांसमेंट्स, नई दवाओं और आधुनिक उपचार रणनीतियों के बारे में जानकारी दी।
150 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. ईशा एवं डॉ. अंतरा द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. शशांक, डॉ. ईशा, डॉ. दीपक, डॉ. मानवी, डॉ. मयंक, डॉ. तान्या, अंजू अनेजा एवं ललित का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
सीएमई में डॉ. योगिता, डॉ. प्रीति, डॉ. निधि, डॉ. नेहा, डॉ. यास्मीन, डॉ. शकुन, डॉ. प्रदीप यादव, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. हिमानी, डॉ. देवांशी, डॉ. मुकेश, डॉ. अंशु, डॉ. अलका, डॉ. अमरेन्द्र चौधरी, डॉ. राहुल सिंह सहित अन्य फैकल्टी सदस्यों ने भी सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम में फाइनल ईयर एमबीबीएस के विद्यार्थियों, इंटर्न्स एवं डायलिसिस टेक्नीशियनों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों के अनुसार सीएमई में लगभग 150 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
डायबिटीज के साथ ओरल हेल्थ को भी दें समान महत्व
सीएमई का मुख्य उद्देश्य मधुमेह और मौखिक स्वास्थ्य के पारस्परिक संबंधों को समझना, चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि करना तथा मधुमेह की देखभाल के साथ मौखिक स्वास्थ्य की देखभाल को भी समान महत्व देने का संदेश आगे बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मधुमेह जैसी दीर्घकालिक बीमारी के प्रबंधन में केवल रक्त शर्करा को नियंत्रित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज के समग्र स्वास्थ्य, जिसमें मौखिक स्वास्थ्य भी शामिल है, पर नियमित ध्यान देना आवश्यक है।