पेट के ट्यूमर की जटिल सर्जरी सफल
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीम ने एक ही ऑपरेशन में छोटी और बड़ी आंत, मूत्रवाहिनी तथा रक्त वाहिका से जुड़े ट्यूमर को निकाला; निजी अस्पताल में 3–4 लाख रुपये तक आने वाला उपचार मेडिकल कॉलेज में करीब 8–10 हजार रुपये के सरकारी खर्च पर हुआ
मेरठ । #ANN लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी टीम ने बागपत निवासी 33 वर्षीय रिज़वान के पेट के दाहिने निचले हिस्से में मौजूद विशाल ट्यूमर की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। लगभग 16 × 15 × 10 सेंटीमीटर आकार की यह गाँठ छोटी आंत के अंतिम हिस्से, दाहिनी ओर की बड़ी आंत और आसपास की कई महत्वपूर्ण संरचनाओं से जुड़ी हुई थी। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक बताई गई है और वह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
मेडिकल कॉलेज के अनुसार, सीटी स्कैन में ट्यूमर का संबंध छोटी आंत के अंतिम हिस्से यानी डिस्टल इलियम, बड़ी आंत के शुरुआती हिस्से सीकम और दाहिनी ओर की बड़ी आंत यानी असेंडिंग कोलन से पाया गया। ट्यूमर के दबाव से दाहिनी मूत्रवाहिनी प्रभावित हो रही थी, जिसके कारण किडनी में हल्की सूजन भी थी। गाँठ को प्रमुख रक्त वाहिकाओं से भी रक्त मिल रहा था। इन कारणों से ऑपरेशन तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार के नेतृत्व में टीम ने ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के लिए छोटी आंत के अंतिम हिस्से और दाहिनी ओर की बड़ी आंत को ट्यूमर सहित हटाया। इसके बाद आंत के बचे हुए हिस्सों को दोबारा जोड़ दिया गया। ट्यूमर से प्रभावित लगभग दो सेंटीमीटर मूत्रवाहिनी को भी निकालकर उसके दोनों सिरों को पुनः जोड़ा गया। मूत्रवाहिनी की सुरक्षा के लिए डीजे स्टेंट लगाया गया।
ट्यूमर का दाहिनी ओर की प्रमुख रक्त वाहिका राइट एक्सटर्नल इलियक वेन से भी घनिष्ठ संबंध था। सुरक्षित रूप से ट्यूमर निकालने के लिए रक्त वाहिका के प्रभावित हिस्से को आंशिक रूप से हटाया गया और उसकी प्राइमरी रिपेयर की गई। इस प्रकार एक ही ऑपरेशन में आंत, मूत्रवाहिनी और रक्त वाहिका से जुड़े विशाल ट्यूमर को निकालने की जटिल प्रक्रिया पूरी की गई।
डॉ. अमित कुमार ने बताया कि ट्यूमर का आंत, मूत्रवाहिनी और रक्त वाहिकाओं के करीब होना सर्जरी की बड़ी चुनौती थी। ऐसे मामलों में ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के साथ-साथ आसपास के महत्वपूर्ण अंगों और रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। मेडिकल कॉलेज की टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन कर इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर. सी. गुप्ता ने सर्जिकल ऑन्कोलॉजी सेवाओं के विस्तार को संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज में ऑन्कोसर्जरी की सुविधा विकसित होने से कैंसर के मरीजों को जटिल सर्जरी के लिए अन्य बड़े केंद्रों पर जाने की आवश्यकता कम होगी। अपने ही संस्थान में विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध होने से मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को लाभ मिलेगा।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रकार की सर्जरी पर निजी चिकित्सालयों में करीब तीन से चार लाख रुपये तक खर्च हो सकता है, जबकि मेडिकल कॉलेज मेरठ में यह सर्जरी लगभग 8 से 10 हजार रुपये के सरकारी खर्च पर की गई। इससे मरीज को कम खर्च में जटिल उपचार उपलब्ध हो सका।
सर्जिकल टीम में डॉ. मोहम्मद आरिफ, असिस्टेंट प्रोफेसर, और डॉ. प्रतीक, जूनियर रेजिडेंट, सहित अन्य चिकित्सकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. विपिन धामा ने किया।