बहुजन मुक्ति पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने विशेष कानून की मांग की
बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजुद्दीन गादरे बोले— धार्मिक उन्माद के जरिए जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
मेरठ । बहुजन मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रभारी राजुद्दीन गादरे ने मुस्लिम समुदाय, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सहित वंचित समाज के अधिकारों को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी आबादी आज भी अन्याय, भेदभाव, असुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। उनके अनुसार लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा मिलना जरूरी है।
संविधान की भावना के अनुरूप निष्पक्ष शासन की मांग
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि संविधान की शपथ लेकर पद संभालने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का दायित्व सभी नागरिकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि शासन-प्रशासन धार्मिक दबाव, भेदभाव या राजनीतिक स्वार्थ के प्रभाव में काम करता है तो यह संविधान की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि जनता को केवल राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, न्याय और सत्ता में वास्तविक भागीदारी चाहिए।
मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष अत्याचार-रोधी कानून की मांग
बहुजन मुक्ति पार्टी नेता ने मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष अत्याचार-रोधी कानून बनाए जाने की मांग की। उन्होंने इसे ‘मुस्लिम एट्रोसिटी एक्ट’ नाम देते हुए कहा कि ऐसे कानून में पीड़ितों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच, समयबद्ध न्याय और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को उसकी धार्मिक पहचान के कारण भय के माहौल में जीवन नहीं बिताना चाहिए। उनके मुताबिक देश में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए और किसी भी धार्मिक संगठन या दबाव समूह की मनमानी को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों में कानूनी तैयारी पर जोर
सहारनपुर की मस्जिद से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए राजुद्दीन गादरे ने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों में समय रहते कानूनी तैयारी, प्रमाणित दस्तावेज, सक्षम अधिवक्ताओं की टीम और सामूहिक विचार-विमर्श आवश्यक है। उन्होंने सार्वजनिक चर्चाओं में सामने आए गवाहों के बयानों, दस्तावेजों तथा वक्फ संपत्तियों से जुड़े प्रमाणों पर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने जयपुर के मालवीय नगर स्थित नूरानी मस्जिद और बनारस में मस्जिद से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल से संबंधित मामले में दबाव में समझौता करने अथवा जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय स्थानीय नागरिकों, संबंधित कमेटियों और कानूनी विशेषज्ञों से व्यापक सलाह ली जानी चाहिए।
‘मस्जिदें केवल इमारतें नहीं, आस्था और सामाजिक जीवन का हिस्सा’
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि मस्जिदें केवल इमारतें नहीं हैं, बल्कि लोगों की आस्था और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता, कानून और संबंधित समुदाय की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
एससी-एसटी समुदाय के लिए दो वोट के अधिकार की मांग
राजुद्दीन गादरे ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर ‘दो वोट के अधिकार’ की व्यवस्था पर राष्ट्रीय बहस की मांग की। उन्होंने कहा कि केवल आरक्षण और चुनावी घोषणाओं से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। उनके अनुसार वंचित समुदायों को सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी मिलना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के बहुजन और वंचित समाज को जाति और धर्म के नाम पर विभाजित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि धार्मिक उन्माद के माध्यम से शिक्षा, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और संवैधानिक अधिकारों जैसे जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाया जाता है।
सामाजिक असमानता के खिलाफ संवैधानिक संघर्ष का दावा
बहुजन मुक्ति पार्टी नेता ने ‘मनुवादी व्यवस्था’ के खिलाफ संवैधानिक संघर्ष जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जातीय और धार्मिक भेदभाव के खिलाफ है तथा शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक समानता पर आधारित व्यवस्था की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि आजादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि समाज का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा, सत्ता और न्याय से वंचित महसूस करता है तो व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।
वंचित वर्गों से एकजुट होने का आह्वान
राजुद्दीन गादरे ने मुस्लिम समाज, एससी-एसटी, ओबीसी और अन्य वंचित वर्गों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनता को अपने मताधिकार की ताकत को समझना होगा और ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण के लिए प्रयास करना होगा जो समता, समानता, न्याय, बंधुता और स्वतंत्रता के संवैधानिक मूल्यों पर आधारित हो।mउन्होंने कहा कि बहुजन मुक्ति पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जनता के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।
‘वोट की चोट से नया भारत बनाने’ का आह्वान
राजुद्दीन गादरे ने कहा कि सत्ता चाहे किसी की भी हो, यदि जनता के सवाल उठाए जाएंगे तो जनता की आवाज भी मजबूती से सामने आएगी। उन्होंने धार्मिक नफरत के स्थान पर शिक्षा, भेदभाव के स्थान पर समानता और तानाशाही के स्थान पर संविधान को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार की ताकत के माध्यम से नए भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
“हमें धार्मिक नफरत नहीं, शिक्षा चाहिए। भेदभाव नहीं, समानता चाहिए। तानाशाही नहीं, संविधान चाहिए। वोट की चोट से नया भारत बनाना है।