जटिल सर्जरी कर मरीज की जान बचाने वाले डॉक्टरों का पैनल
45 वर्षीय मरीज में पैरों का सुन्नपन और मल-मूत्र पर नियंत्रण की समस्या के बाद 24 घंटे के भीतर की गई आपातकालीन सर्जरी
मेरठ । राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंकटेश्वरा संस्थान के सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल विम्स में आर्थोपेडिक एवं सर्जरी विभाग की टीम ने रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति ‘कॉडा इक्विना सिंड्रोम’ की सफल सर्जरी की। अस्पताल के अनुसार संभल के गुन्नौर निवासी 45 वर्षीय मरीज नेमचंद में अचानक शरीर के निचले हिस्से में संवेदना कम होने, पैरों में सुन्नपन तथा मल-मूत्र के नियंत्रण से संबंधित समस्या उत्पन्न हुई थी। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मरीज की जांच के बाद 24 घंटे के भीतर आपातकालीन सर्जरी की गई।
क्या है कॉडा इक्विना सिंड्रोम?
विम्स के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार कॉडा इक्विना सिंड्रोम रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में स्थित नसों के समूह पर गंभीर दबाव पड़ने से उत्पन्न होने वाली स्थिति है। इसमें कमर के नीचे तेज दर्द, पैरों में कमजोरी या सुन्नपन तथा जननांग और मलाशय के आसपास संवेदना में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में मल-मूत्र पर नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। चिकित्सकों ने बताया कि इस प्रकार के लक्षणों को गंभीरता से लेना आवश्यक है। एमआरआई जैसी जांचों के माध्यम से स्थिति की पुष्टि किए जाने के बाद, मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार तत्काल उपचार एवं आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन सर्जरी की जाती है। अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक समय पर उपचार न मिलने पर स्थायी तंत्रिका क्षति और विकलांगता का जोखिम बढ़ सकता है।
24 घंटे के भीतर की गई जटिल सर्जरी
अस्पताल के अनुसार नेमचंद को शरीर के निचले हिस्से में संवेदना की कमी और मल-मूत्र नियंत्रण प्रभावित होने की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकीय जांच और एमआरआई में कॉडा इक्विना सिंड्रोम की पुष्टि होने के बाद मरीज की स्थिति को देखते हुए आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया गया। विम्स की आर्थोपेडिक, स्पाइन सर्जरी और एनेस्थीसिया टीम के अनुभवी चिकित्सकों ने मिलकर सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि समय पर की गई सर्जरी से मरीज को गंभीर स्थायी जटिलताओं से बचाने में मदद मिली।
दो से तीन सप्ताह में सुधार की उम्मीद
वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विशाल सिद्धू, स्पाइन सर्जन डॉ. अमित रे और प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी ने संयुक्त रूप से बताया कि मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार आगामी दो से तीन सप्ताह में मरीज के शरीर के ऊपरी हिस्से से निचले हिस्से की ओर संवेदनाओं के संचार में सुधार की उम्मीद है। हालांकि ऐसे मामलों में स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति की स्थिति और तंत्रिका क्षति की गंभीरता सहित विभिन्न चिकित्सकीय कारकों पर निर्भर करता है।
संस्थापक अध्यक्ष ने टीम को दी बधाई
सफल सर्जरी पर वेंकटेश्वरा समूह के संस्थापक अध्यक्ष श्री सुधीर गिरि ने चिकित्सकों और पूरी आर्थोपेडिक टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विम्स में आधुनिक चिकित्सा तकनीक और अनुभवी चिकित्सकों की टीम के माध्यम से गंभीर एवं जटिल मामलों के उपचार की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विम्स सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल को चिकित्सा सेवाओं का ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों को मिल रही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा: डॉ. राजीव त्यागी
वेंकटेश्वरा समूह के प्रतिकुलाधिपति डॉ. राजीव त्यागी ने कहा कि अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अनुभवी चिकित्सकों और विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के माध्यम से गंभीर बीमारियों एवं जटिल सर्जरी के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सस्ती, सुलभ और प्रभावी चिकित्सा सेवाओं के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से मेरठ और मुरादाबाद क्षेत्र के मरीज अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
सर्जरी करने वाली टीम को दी गई बधाई
मरीज की सफल सर्जरी करने वाली टीम में विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिद्धू, स्पाइनल सर्जन डॉ. अमित रे, आर्थो सर्जन डॉ. मिस्बाह तथा एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. विपिन कुमार सहित अन्य चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मी शामिल रहे। सफल उपचार के बाद वित्त निदेशक युवराज सिंह, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. शिशिर पाटिल, एडिशनल एमएस डॉ. अमित जैन, हॉस्पिटल निदेशक/जीएम मेघा सबरवाल, डॉ. अभय भटनागर, डॉ. पंकज सिंह और मीडिया प्रभारी विश्वास राणा सहित अस्पताल प्रबंधन एवं स्टाफ ने चिकित्सकीय टीम को बधाई दी।