राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेई ने उठाया डीडीए फ्लैट पर वैधानिक नियंत्रण का मुद्दा
नई दिल्ली। राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, मुख्य सचेतक एवं राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा निर्मित और बेचे गए फ्रीहोल्ड फ्लैटों पर वैधानिक नियंत्रण, रखरखाव तथा साझा सुविधाओं की जिम्मेदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने तारांकित प्रश्न संख्या-164 के माध्यम से आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से वर्ष 2010 से पहले और वर्ष 2010 के बाद शुरू हुई डीडीए आवासीय योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी।
डॉ. बाजपेयी ने अपने प्रश्न में जानना चाहा कि फ्रीहोल्ड फ्लैटों का स्वामित्व हस्तांतरित होने के बाद डीडीए की क्या जिम्मेदारियां रहती हैं, साझा क्षेत्रों के रखरखाव की व्यवस्था किस प्रकार होती है तथा भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा, बाहरी मरम्मत और सौर पैनल लगाने जैसे मामलों में डीडीए की भूमिका क्या है।
सरकार ने सदन में रखा विस्तृत उत्तर
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री की ओर से सदन में दिए गए लिखित उत्तर में स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2010 से पहले और उसके बाद की डीडीए आवासीय योजनाओं में रखरखाव और जिम्मेदारियों की व्यवस्था अलग-अलग है।
सरकार ने कहा कि वर्ष 2010 से पहले जिन फ्लैटों का कन्वेयंस डीड निष्पादित होकर फ्रीहोल्ड आधार पर हस्तांतरण हो चुका है, उनका पूर्ण स्वामित्व संबंधित आवंटी के पास होता है। हालांकि ब्लॉक की सीढ़ियां, छत, कॉरिडोर और अन्य साझा सुविधाएं सभी निवासियों के सामूहिक उपयोग के लिए बनी रहती हैं।
इसके साथ ही पार्क, सड़क, स्ट्रीट लाइट, चारदीवारी, जल निकासी जैसी सार्वजनिक सुविधाएं स्थानीय निकाय यानी दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को तथा जलापूर्ति एवं सीवरेज व्यवस्था दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को हस्तांतरित कर दी जाती हैं।
कॉमन एरिया पर डीडीए का अधिकार कब तक?
सरकार ने स्पष्ट किया कि पार्क, खुले मैदान, सड़क, चारदीवारी और अन्य कॉमन एरिया पर डीडीए का अधिकार तब तक बना रहता है, जब तक इन क्षेत्रों को विधिवत पट्टा विलेख (लीज डीड) के माध्यम से पंजीकृत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को हस्तांतरित नहीं कर दिया जाता।
यानी फ्लैट का स्वामित्व आवंटी को मिलने के बावजूद साझा क्षेत्रों का नियंत्रण निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने तक डीडीए के पास बना रहता है।
वर्ष 2010 से पहले की योजनाओं में मेंटेनेंस की जिम्मेदारी
सरकार ने बताया कि वर्ष 2010 से पहले शुरू हुई आवासीय योजनाओं में डीडीए ने आवंटियों से कोई मेंटेनेंस शुल्क नहीं लिया था। इसलिए इन योजनाओं में नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी डीडीए की नहीं होती।
इन आवासीय परिसरों में दिन-प्रतिदिन के रखरखाव का कार्य संबंधित रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) द्वारा किया जाता है।
वर्ष 2010 के बाद लागू हुई नई व्यवस्था
सरकार ने बताया कि वर्ष 2010 के बाद शुरू हुई डीडीए की आवासीय योजनाओं में आवंटन के समय सेवा शुल्क और कॉर्पस फंड लिया जाता है। इसी निधि के माध्यम से कॉमन एरिया तथा साझा सुविधाओं का रखरखाव किया जाता है।
डीडीए द्वारा लिफ्ट, अग्निशमन प्रणाली, डीजी सेट, ओवरहेड टैंक, भूमिगत जलाशय, जलापूर्ति व्यवस्था, सीवरेज प्रणाली तथा अन्य साझा सुविधाओं का रखरखाव निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है।
जहां व्यक्तिगत जल मीटर की व्यवस्था नहीं है, वहां डीडीए जलापूर्ति और सीवरेज लाइनों के साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का रखरखाव भी करता है।
सिविल और इलेक्ट्रिकल रखरखाव की पूरी व्यवस्था
सरकार ने बताया कि डीडीए की जिम्मेदारियों में समय-समय पर सिविल एवं इलेक्ट्रिकल रखरखाव भी शामिल है।
सिविल कार्यों में पेंटिंग, व्हाइट वॉश, प्लास्टर, रेलिंग की मरम्मत, सीढ़ियों की फ्लोरिंग, सैनिटरी लाइन, बालकनी और खिड़कियों की मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं।
इलेक्ट्रिकल रखरखाव के अंतर्गत लिफ्ट, फायर फाइटिंग सिस्टम, डीजी सेट, जल पंप तथा अन्य विद्युत सुविधाओं का रखरखाव किया जाता है।
भवनों में उगने वाले पेड़ों और संरचनात्मक क्षति पर क्या होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भवन की दीवारों या संरचना में पेड़ उगने जैसी समस्या सामने आती है तो डीडीए उसका संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करता है। ऐसे मामलों में निर्णय लेने से पहले संबंधित आरडब्ल्यूए से भी परामर्श किया जाता है।
सौर पैनल लगाने के लिए क्या हैं नियम?
सरकार ने कहा कि व्यक्तिगत फ्लैट मालिक अपनी इच्छा से सौर पैनल स्थापित नहीं कर सकते।
इसके लिए संबंधित आरडब्ल्यूए अथवा ब्लॉक के कम से कम 75 प्रतिशत फ्लैट मालिकों द्वारा संयुक्त रूप से आवेदन करना होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि भवन की संरचनात्मक मजबूती, सुरक्षा और सामान्य सुविधाओं पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
1 अप्रैल 2026 से लागू हुई नई SOP
सरकार ने बताया कि डीडीए ने 1 अप्रैल 2026 से हाउसिंग पॉकेट्स के दैनिक रखरखाव के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की है।
इस व्यवस्था के तहत जब तक किसी परियोजना में 80 प्रतिशत अधिभोग पूरा नहीं हो जाता अथवा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) का गठन नहीं हो जाता, तब तक कॉमन एरिया और साझा सेवाओं का रखरखाव डीडीए द्वारा किया जाएगा।
इसके बाद यह जिम्मेदारी संबंधित आरडब्ल्यूए को सौंप दी जाएगी। वहीं प्रत्येक फ्लैट के अंदरूनी रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित फ्लैट मालिक की होगी।
डॉ. बाजपेयी बोले – नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है यह जानकारी
राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि दिल्ली में लाखों लोग डीडीए के फ्रीहोल्ड फ्लैटों में रहते हैं। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि संपत्ति का स्वामित्व मिलने के बाद डीडीए की जिम्मेदारी किस सीमा तक रहती है और साझा सुविधाओं के रखरखाव की जवाबदेही किसकी होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सदन में दिया गया विस्तृत उत्तर फ्लैट मालिकों, आरडब्ल्यूए और आम नागरिकों के लिए उपयोगी मार्गदर्शन का कार्य करेगा।
मुख्य बिंदु
- राज्यसभा में डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने डीडीए फ्लैटों पर वैधानिक नियंत्रण का मुद्दा उठाया।
- सरकार ने वर्ष 2010 से पहले और बाद की योजनाओं के अलग-अलग नियम स्पष्ट किए।
- फ्रीहोल्ड फ्लैट का स्वामित्व आवंटी को मिलता है, लेकिन कॉमन एरिया पर डीडीए का अधिकार निर्धारित प्रक्रिया तक बना रहता है।
- वर्ष 2010 के बाद की योजनाओं में सेवा शुल्क और कॉर्पस फंड के माध्यम से साझा सुविधाओं का रखरखाव किया जाता है।
- भवनों की संरचनात्मक क्षति पर डीडीए कार्रवाई करता है और आरडब्ल्यूए से परामर्श लिया जाता है।
- सौर पैनल लगाने के लिए आरडब्ल्यूए अथवा 75 प्रतिशत फ्लैट मालिकों की संयुक्त सहमति अनिवार्य है।
- 1 अप्रैल 2026 से लागू नई एसओपी के तहत 80 प्रतिशत अधिभोग या आरडब्ल्यूए गठन तक डीडीए साझा सुविधाओं का रखरखाव करेगा।