ऑनलाइन संकाय कार्यक्रम में शामिल लोग
मेरठ, 2 सितंबर 2026। रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, मेरठ में शिक्षक पुनः कौशल विकास प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित पांच दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम के द्वितीय दिवस का सफल आयोजन किया गया। प्राचार्या प्रोफेसर निवेदिता कुमारी के निर्देशन में आयोजित यह कार्यक्रम 1 सितंबर से 5 सितंबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य विषय “कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से शोध, अकादमिक लेखन, शोध की ईमानदारी एवं वैज्ञानिक संप्रेषण” है।
साहित्य समीक्षा और शोध सामग्री की खोज रहा दूसरे दिन का मुख्य विषय
कार्यक्रम के दूसरे दिन का विषय “साहित्य समीक्षा, शोध सामग्री की खोज और अकादमिक लेखन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण” रहा। मुख्य संसाधन विशेषज्ञ के रूप में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. मयंक युवराज ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने आधुनिक शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते महत्व के साथ ही शोध कार्य में एआई आधारित उपकरणों के प्रभावी, व्यवस्थित और जिम्मेदार उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. मयंक युवराज ने कहा कि वर्तमान समय में शोधकर्ताओं और शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती विशाल मात्रा में उपलब्ध शोध सामग्री में से अपने विषय से संबंधित प्रासंगिक, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का चयन करना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण इस प्रक्रिया को अधिक सरल, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शोध शुरू करने से पहले सही शोध समस्या और प्रमुख शब्दों की पहचान जरूरी
उन्होंने बताया कि किसी भी शोध कार्य को शुरू करने से पहले शोध समस्या, प्रमुख शब्दों और शोध से जुड़ी महत्वपूर्ण अवधारणाओं की स्पष्ट पहचान आवश्यक है। एआई आधारित उपकरणों की सहायता से शोधकर्ता अपने विषय से संबंधित नवीनतम शोध, महत्वपूर्ण शोध-पत्र और संबंधित अकादमिक क्षेत्रों की जानकारी अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि, उन्होंने प्रतिभागियों को सावधान करते हुए कहा कि केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्राप्त जानकारी पर निर्भर रहना उचित नहीं है। शोध सामग्री के मूल स्रोतों की जांच करना, संदर्भों का सत्यापन करना और उपलब्ध जानकारी की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना शोधकर्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
साहित्य समीक्षा केवल सामग्री एकत्र करने तक सीमित नहीं
डॉ. युवराज ने साहित्य समीक्षा को शोध की एक महत्वपूर्ण और व्यवस्थित प्रक्रिया बताते हुए कहा कि अच्छी साहित्य समीक्षा केवल पूर्व में किए गए अध्ययनों को एकत्र करने का कार्य नहीं है। इसके लिए उपलब्ध शोधों का विश्लेषण, तुलना और आलोचनात्मक अध्ययन भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से शोधकर्ता एक साथ कई महत्वपूर्ण शोध-पत्रों का व्यवस्थित विश्लेषण कर सकते हैं। विभिन्न शोध-पत्रों से प्राप्त शोध उद्देश्य, पद्धति, प्रमुख तथ्य और निष्कर्षों को एक व्यापक विश्लेषण तालिका अथवा साक्ष्य निष्कर्षण तालिका में व्यवस्थित किया जा सकता है।
साक्ष्य निष्कर्षण तालिका से शोध कार्य होगा अधिक व्यवस्थित
सत्र के दौरान साक्ष्य निष्कर्षण तालिका की उपयोगिता को भी विस्तार से समझाया गया। उन्होंने बताया कि इस तालिका में शोध-पत्र के लेखक, प्रकाशन वर्ष, शोध का उद्देश्य, नमूना, शोध पद्धति, प्रमुख निष्कर्ष और शोध की सीमाओं जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जा सकता है।
इस प्रकार की तालिका शोधकर्ता को विभिन्न अध्ययनों के बीच समानताओं और अंतर को समझने के साथ-साथ महत्वपूर्ण निष्कर्षों तथा संभावित शोध-अंतरालों की पहचान करने में भी सहायता करती है। इससे साहित्य समीक्षा अधिक क्रमबद्ध, तार्किक और वैज्ञानिक स्वरूप में तैयार की जा सकती है।
एआई से शोध में पैटर्न और रिसर्च गैप की पहचान में मदद
डॉ. मयंक युवराज ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का उपयोग विभिन्न शोध अध्ययनों की तुलना करने, महत्वपूर्ण तथ्यों को निकालने, समानताओं और अंतर की पहचान करने तथा उभरते हुए प्रतिरूपों को समझने के लिए किया जा सकता है। इसके माध्यम से शोधकर्ता अपने विषय में मौजूद संभावित रिसर्च गैप की पहचान कर अपने शोध को नई दिशा दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि एआई बड़ी मात्रा में उपलब्ध सामग्री को व्यवस्थित और विश्लेषित करने में शोधकर्ता की सहायता कर सकती है, लेकिन अंतिम अकादमिक तर्क और निष्कर्ष पर शोधकर्ता का अपना बौद्धिक नियंत्रण होना आवश्यक है।
शोधकर्ता का स्थान नहीं ले सकती कृत्रिम बुद्धिमत्ता
डॉ. युवराज ने विशेष रूप से कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोधकर्ता का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि एक सहयोगी और सहायक उपकरण के रूप में कार्य करती है। शोध की अंतिम अकादमिक दलील, व्याख्या और निष्कर्ष शोधकर्ता की अपनी सोच, विश्लेषण, तर्कशक्ति और वैज्ञानिक समझ पर आधारित होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि एआई शोध प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बना सकती है, लेकिन शोध की मौलिकता तथा अंतिम निर्णय की जिम्मेदारी शोधकर्ता की ही होती है।
ChatPDF से लेकर Zotero और Paperpal तक विभिन्न डिजिटल टूल्स की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मयंक युवराज ने विभिन्न एआई और डिजिटल शोध उपकरणों के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ChatPDF की सहायता से शोध-पत्रों और पीडीएफ दस्तावेजों को समझने तथा उनसे महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
इसी प्रकार Research Rabbit संबंधित शोध-पत्रों, महत्वपूर्ण लेखकों और शोध नेटवर्क की खोज में उपयोगी है, जबकि Zotero संदर्भों और शोध सामग्री को व्यवस्थित करने के लिए उपयोगी डिजिटल माध्यम है।
उन्होंने Scholarcy के माध्यम से शोध सामग्री के प्रमुख बिंदुओं को समझने, QuillBot के माध्यम से भाषा और लेखन को बेहतर बनाने तथा Paperpal की सहायता से अकादमिक लेखन की भाषा, व्याकरण और प्रस्तुति में सुधार की संभावनाओं को भी समझाया।
उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि किसी एक एआई उपकरण पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय शोधकर्ता को अपनी आवश्यकता और शोध के उद्देश्य के अनुरूप उपयुक्त डिजिटल उपकरण का चयन करना चाहिए।
अकादमिक लेखन में एआई के उपयोग के साथ मौलिकता जरूरी
अकादमिक लेखन के संदर्भ में डॉ. युवराज ने कहा कि एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल विचारों को व्यवस्थित करने, भाषा में सुधार करने, व्याकरण संबंधी त्रुटियों को दूर करने तथा शोध-पत्र की संरचना को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग सहायक उपकरण के रूप में ही किया जाना चाहिए। किसी भी शोध की वास्तविक शक्ति शोधकर्ता की अपनी सोच, विश्लेषण, तर्कशक्ति और मौलिक योगदान में निहित होती है।
शोध की ईमानदारी और अकादमिक नैतिकता पर दिया जोर
सत्र में शोध की मौलिकता, सत्यनिष्ठा और अकादमिक नैतिकता पर भी विशेष जोर दिया गया। डॉ. युवराज ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्राप्त सामग्री का उपयोग करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है। गलत अथवा असत्य जानकारी, गलत संदर्भ और बिना सत्यापन के तथ्यों का इस्तेमाल शोध की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों से एआई आधारित उपकरणों का उपयोग जिम्मेदारी, सावधानी और अकादमिक ईमानदारी के साथ करने का आह्वान किया।
देश के विभिन्न राज्यों से करीब 150 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
ऑनलाइन आयोजित यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक और संवादात्मक रहा। देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े शिक्षकों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने शोध, साहित्य समीक्षा, अकादमिक लेखन तथा एआई आधारित उपकरणों के उपयोग से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. मयंक युवराज ने विस्तारपूर्वक समाधान किया।
कार्यक्रम में लगभग 150 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इससे कार्यक्रम की राष्ट्रीय स्तर पर उपयोगिता और अकादमिक रुचि का पता चलता है।
प्राचार्या ने तकनीकी बदलावों के अनुरूप शिक्षकों को तैयार करने पर दिया जोर
प्राचार्या प्रोफेसर निवेदिता कुमारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को समझना वर्तमान समय की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध और अकादमिक जगत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है, ऐसे में शिक्षकों और शोधार्थियों को इसके उचित, नैतिक और प्रभावी उपयोग की जानकारी होना जरूरी है।
उन्होंने शिक्षक पुनः कौशल विकास प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को आधुनिक शोध की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
डिजिटल तकनीकों की जानकारी वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में महत्वपूर्ण : प्रो. सोनिका चौधरी
संकाय विकास कार्यक्रम एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रोफेसर सोनिका चौधरी ने भी कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए नई तकनीकों तथा डिजिटल उपकरणों की जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम प्रतिभागियों को शोध और अकादमिक लेखन के क्षेत्र में नवीन कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं तथा उन्हें बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुरूप तैयार करने में सहायक होते हैं।
डॉ. गरिमा मलिक ने किया कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम का संचालन शिक्षक पुनः कौशल विकास प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. गरिमा मलिक ने किया। उन्होंने मुख्य संसाधन विशेषज्ञ डॉ. मयंक युवराज का स्वागत किया और उनके ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी व्याख्यान के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में समिति के सभी सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा।