मिनी जलियांवाला गोली कांड के शहीदों के वंशजों का किया सम्मान
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शहीद हुए पांच वीरों की स्मृति में अंतर्राष्ट्रीय सनातन ट्रस्ट ने आयोजित किया सम्मान समारोह
सरधना (मेरठ) । 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष में शहीद हुए ग्राम भांभौरी के पांच वीरों की स्मृति में मंगलवार को विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। तहसील सरधना क्षेत्र के शहीद ग्राम भांभौरी में अंतर्राष्ट्रीय सनातन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में 18 अगस्त 1942 को हुए ऐतिहासिक मिनी जलियांवाला गोलीकांड को याद करते हुए शहीदों के वंशजों को सम्मानित किया गया। समारोह का उद्देश्य स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उन परिवारों के योगदान को सम्मान देना रहा, जिनके पूर्वजों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
1942 के गोलीकांड में शहीद हुए थे पांच वीर
कार्यक्रम में बताया गया कि 18 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भांभौरी में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध हुए आंदोलन के दौरान गोलीकांड की घटना हुई थी। इस घटना में श्री रामस्वरूप शर्मा, ठाकुर प्रह्लाद सिंह, लट्टूर सिंह, फतेह सिंह और बोबल सिंह कश्यप शहीद हुए थे। इन वीरों की स्मृति आज भी गांव की सामूहिक चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की स्थानीय विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
शहीदों के वंशजों को किया गया सम्मानित
समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति पदक से अलंकृत एवं भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के उप संरक्षक श्री सरबजीत सिंह कपूर रहे। कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित शहीदों के वंशज श्री शिव ओम शर्मा, श्री निशांत कुमार, श्री विशाल, श्री मांगे राम और श्री राज सिंह को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मान प्रतीक एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह के दौरान शहीद परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा गया कि स्वतंत्रता प्राप्ति का इतिहास केवल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित आंदोलनों और बड़े शहरों में हुए संघर्षों तक सीमित नहीं है। देश की आजादी की नींव गांव-गांव में हुए संघर्षों, आम नागरिकों के साहस और असंख्य परिवारों के बलिदान से भी मजबूत हुई।
स्थानीय इतिहास को राष्ट्रीय इतिहास से जोड़ना जरूरी : सरबजीत सिंह कपूर
मुख्य अतिथि श्री सरबजीत सिंह कपूर ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास केवल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित घटनाओं और महानगरों तक सीमित नहीं है। भारत की स्वतंत्रता की वास्तविक शक्ति उन गांवों, परिवारों और सामान्य नागरिकों के बलिदान में भी निहित थी, जिन्होंने बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के स्थानीय इतिहास से परिचित कराना आवश्यक है। युवाओं को अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों के जीवन और उनके परिवारों से जुड़ी स्मृतियों को जानने के साथ-साथ उन्हें संकलित और संरक्षित करने की दिशा में भी कार्य करना चाहिए। उन्होंने स्थानीय इतिहास को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया।
भांभौरी के लिए गोलीकांड गांव के गौरव का हिस्सा : ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधान श्री दिनेश सोम ने कहा कि भांभौरी के लिए वर्ष 1942 का गोलीकांड केवल इतिहास की एक घटना नहीं है, बल्कि यह गांव की सामूहिक स्मृति और गौरव का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने उन पूर्वजों के बारे में जानना चाहिए, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्योछावर किया।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर शहीदों से जुड़े स्थलों, उनके परिवारों और मौखिक इतिहास को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम समुदाय भविष्य में भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी इन ऐतिहासिक स्मृतियों को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहयोग करेगा।
मौखिक इतिहास को दस्तावेजीकृत करने पर जोर
इतिहासकार एवं अंतर्राष्ट्रीय सनातन ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. शुचि गुप्ता ने कहा कि स्थानीय इतिहास को राष्ट्रीय इतिहास की मुख्यधारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत के गांवों में हुए प्रतिरोध, अंग्रेजी शासन के दमन, आम नागरिकों के बलिदान और पीढ़ियों से चली आ रही जन स्मृतियां भी देश के इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि स्थानीय शहीदों की स्मृति केवल परिवारों और गांवों की मौखिक परंपराओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इन घटनाओं, शहीद परिवारों की स्मृतियों और उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाणों को व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास को जान सकें।
शहीदों की स्मृति को जीवित रखना सामूहिक जिम्मेदारी
अंतर्राष्ट्रीय सनातन ट्रस्ट ने कार्यक्रम को स्थानीय इतिहास, शहीद स्मृति और भावी पीढ़ियों में ऐतिहासिक चेतना के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि स्वतंत्रता आंदोलन में स्थानीय स्तर पर हुए संघर्षों और बलिदानों को सामने लाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भांभौरी में आयोजित यह सम्मान समारोह केवल शहीदों के वंशजों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्थानीय इतिहास के संरक्षण, स्वतंत्रता संग्राम की अनकही कहानियों को सामने लाने और युवा पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम में शहीदों के बलिदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके आदर्शों और देशभक्ति की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।