महिला प्रौद्योगिकी पार्क में निर्मित सुगंधित अगरबत्ती का निरीक्षण करते कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ त्रिवेणी दत्त
महिला प्रौद्योगिकी पार्क में निर्मित सुगंधित अगरबत्ती
का निरीक्षण करते कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ त्रिवेणी दत्त
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में महिलाओं के कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए महिला प्रौद्योगिकी पार्क का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने महिला प्रौद्योगिकी पार्क का उद्घाटन किया। यह पार्क भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित शोध परियोजना के अंतर्गत स्थापित किया गया है।
महिला प्रौद्योगिकी पार्क का उद्देश्य ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्र की महिलाओं को तकनीकी एवं व्यावहारिक कौशल से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय में सुगंधित मोमबत्ती, परफ्यूम तथा अगरबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 7 से 9 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है।
भलसोना गांव की महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण में हिस्सा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सरूरपुर ब्लॉक के भलसोना गांव से आई महिलाओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. रश्मि, प्रोफेसर एवं परियोजना पोषक, ने सभी प्रतिभागी महिलाओं का स्वागत किया। उन्होंने महिलाओं को सुगंधित तेलों तथा उनसे तैयार किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. रश्मि ने कहा कि आज की नारी शिक्षा और हुनर के दम पर समाज में बराबरी के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास के माध्यम से महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने महिला प्रौद्योगिकी पार्क के माध्यम से महिलाओं के कौशल विकास एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
कुलपति ने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं नए कौशल सीखकर स्वरोजगार शुरू करने के साथ-साथ उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकती हैं।
उन्होंने महिला प्रौद्योगिकी पार्क को महिलाओं को तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में उपयोगी पहल बताया।
एरोमा आधारित उत्पादों में मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. सुनील कुमार, निदेशक, भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम तथा डॉ. मान्या चतुर्वेदी, जिला ग्राम्य विकास अधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
डॉ. सुनील कुमार ने एरोमा आधारित उत्पादों के निर्माण और उनमें मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं को उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों के माध्यम से तैयार उत्पादों को बेहतर गुणवत्ता और उचित पैकेजिंग के साथ व्यावसायिक स्तर तक ले जाया जा सकता है।
सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार से जुड़ने पर जोर
डॉ. मान्या चतुर्वेदी ने ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण में कौशल आधारित प्रशिक्षण की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के उपलब्ध अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को यदि प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए तो वे अपनी क्षमताओं का उपयोग करते हुए आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं।
महिलाओं को मोमबत्ती, परफ्यूम और अगरबत्ती निर्माण की दी गई तकनीकी जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सुगंधित मोमबत्ती, परफ्यूम, अगरबत्ती एवं धूपबत्ती तैयार करने की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें स्वयं उत्पाद तैयार करने का अवसर भी दिया गया।
प्रतिभागियों को कच्चे माल के चयन, सुगंधित तेलों के उचित मिश्रण, उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग तथा विपणन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। महिलाओं ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न उत्पाद तैयार किए और उनके निर्माण की बारीकियों को समझा।
विश्वविद्यालय के कौशल विकास कार्यक्रमों में भाग लेने का आह्वान
कार्यक्रम में डॉ. कमल खिलाड़ी, निदेशक शोध तथा डॉ. राम जी सिंह, अधिष्ठाता कृषि ने भी महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने महिलाओं से विश्वविद्यालय में संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़ने और उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उपयोगी तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि वे अपनी आय के नए साधन विकसित कर सकें।
कार्यक्रम का संचालन और आभार
कार्यक्रम का संचालन वर्णिका त्यागी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. निशा वर्मा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
महिला प्रौद्योगिकी पार्क के माध्यम से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्र की महिलाओं को तकनीकी कौशल, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर उत्पाद निर्माण के साथ-साथ अपने कौशल को व्यावसायिक गतिविधियों में बदलने का अवसर मिल सकेगा।