विकास भवन सभागार में बैठक लेते जिलाधिकारी डॉ वी के सिंह
विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने की विभागवार समीक्षा, खराब प्रदर्शन करने वाले आईजीआरएस नोडल अधिकारियों पर जताई नाराजगी
मेरठ । जनशिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापरक निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने सोमवार को विकास भवन सभागार में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी ने विभागवार शिकायतों की स्थिति, उनके निस्तारण की गुणवत्ता और शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जनशिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए।
शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में आईजीआरएस
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने कहा कि आईजीआरएस शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए सभी विभागीय अधिकारी और आईजीआरएस के नोडल अधिकारी पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा करें और प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि केवल शिकायत का औपचारिक निस्तारण दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। निस्तारण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि शिकायतकर्ता को दोबारा उसी समस्या के लिए शिकायत न करनी पड़े।
खराब प्रदर्शन पर डीएम ने जताई नाराजगी
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कुछ विभागीय आईजीआरएस नोडल अधिकारियों के खराब प्रदर्शन पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही या शिथिलता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही अथवा कार्य में शिथिलता के कारण जनपद की आईजीआरएस रैंकिंग प्रभावित होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने को कहा।
शिकायतकर्ता से फोन पर बात कर लें फीडबैक
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण के बाद संबंधित अधिकारी शिकायतकर्ता से दूरभाष पर वार्ता कर फीडबैक प्राप्त करें। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता के अनुसार अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर शिकायत का सत्यापन करें। विशेष रूप से ऐसी शिकायतों में, जिनमें स्थलीय जांच की आवश्यकता हो, संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति की जांच करें और उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
जनपद की रैंकिंग पर भी रहे विशेष ध्यान
जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस पर प्राप्त शिकायतों का निस्तारण केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिकायतों के गुणवत्तापरक समाधान के साथ-साथ अधिकारियों को फीडबैक की स्थिति और जनपद की रैंकिंग पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पोर्टल पर लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा करते हुए समय सीमा के भीतर उनका निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। किसी शिकायत के निस्तारण में आने वाली समस्या की जानकारी भी उच्चाधिकारियों को समय से उपलब्ध कराई जाए।
अधिकारियों को दिए नियमित समीक्षा के निर्देश
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि विभागीय अधिकारी अपने-अपने स्तर पर आईजीआरएस प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें। शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता, समयबद्धता और शिकायतकर्ता की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसामान्य की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ कार्य करे। आईजीआरएस पोर्टल शासन और आमजन के बीच शिकायतों के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए इसके प्रभावी संचालन में सभी अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम प्रसाद, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विजय वर्धन तोमर, जिला पंचायत राज अधिकारी वीरेन्द्र सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी, जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश कुमार गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को जनशिकायतों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाते हुए प्रभावी कार्रवाई करने और शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।