निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करती सरस्वती शिशु मंदिर की छात्राएं
मेरठ। हिंदी साहित्य के महान उपन्यासकार एवं युगप्रवर्तक साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर, मेरठ में बुधवार को भव्य साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत कविता पाठ एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यालय के लगभग 60 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी साहित्यिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना, भाषा कौशल को निखारना तथा मुंशी प्रेमचंद के साहित्य और उनके सामाजिक विचारों से नई पीढ़ी को परिचित कराना था। विद्यालय परिसर पूरे दिन साहित्यिक वातावरण से सराबोर रहा और विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को गरिमामय बनाया। उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने महान साहित्यकार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।
निबंध प्रतियोगिता में सामाजिक सरोकारों पर रखे विचार
निबंध लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को समसामयिक और साहित्यिक विषय दिए गए। इनमें “प्रेमचंद और आज का समाज”, “साहित्य में नैतिकता” तथा “ग्रामीण जीवन का चित्रण” प्रमुख विषय रहे।
प्रतिभागियों ने अपने निबंधों में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, समाज सुधार के प्रति उनकी सोच, ग्रामीण जीवन की वास्तविकता और नैतिक मूल्यों पर प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने अपने लेखन के माध्यम से यह भी बताया कि आज के समय में प्रेमचंद के विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हैं।
कविता प्रतियोगिता में गूंजे देशभक्ति और नैतिकता के स्वर
कविता प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने प्रेमचंद के आदर्शों, राष्ट्रप्रेम, नैतिक मूल्यों, प्रकृति और सामाजिक समरसता पर आधारित स्वरचित कविताओं का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया।
विद्यार्थियों की आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति, स्पष्ट उच्चारण और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने उपस्थित शिक्षकों एवं निर्णायकों को प्रभावित किया। मंच पर बच्चों की साहित्यिक अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
निर्णायकों ने किया प्रतिभाओं का मूल्यांकन
प्रतियोगिता का मूल्यांकन अशोक कुमार सक्सेना एवं आनंद कुमार जौहरी ने किया। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की भाषा, मौलिकता, विषय की समझ, प्रस्तुति शैली और भावाभिव्यक्ति के आधार पर उनका मूल्यांकन किया।
लगभग 60 प्रतिभागियों की उत्कृष्ट प्रस्तुति देखकर निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों की साहित्यिक प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी में हिंदी साहित्य के प्रति बढ़ती रुचि उत्साहजनक है।
शिक्षिकाओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
- कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की शिक्षिकाओं का विशेष योगदान रहा।
- श्रीमती नीता चौधरी ने प्रतियोगिता के समन्वय की जिम्मेदारी संभाली।
- श्रीमती अंजना शर्मा ने कविता प्रतियोगिता का संचालन किया।
- श्रीमती पूर्णिमा गोयल ने निबंध लेखन प्रतियोगिता का संचालन किया।
- श्रीमती सोनिया अग्रवाल ने मंच संचालन एवं अनुशासन व्यवस्था का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
- सभी शिक्षिकाओं के समर्पण और सहयोग से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ।
प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को दिया प्रेरणादायी संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रभात कुमार गुप्ता ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि समाज के सच्चे दर्पण थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से किसानों, मजदूरों और समाज के वंचित वर्ग की पीड़ा को शब्द दिए तथा सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी प्रहार किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज आवश्यकता केवल प्रेमचंद की रचनाओं को पढ़ने की नहीं, बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की है। साहित्य व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है और नियमित अध्ययन तथा लेखन से ही समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
प्रधानाचार्य ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया तथा भविष्य में भी विद्यालय में इस प्रकार की साहित्यिक गतिविधियों का नियमित आयोजन करने का संकल्प दोहराया।
साहित्य से जुड़ने की मिली नई प्रेरणा
कार्यक्रम के समापन पर वरिष्ठ हिंदी शिक्षिका श्रीमती नीता चौधरी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, निर्णायकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
विद्यालय परिवार ने सभी प्रतिभागियों के उत्साह, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, भाषा कौशल, रचनात्मक सोच और अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि ऐसे आयोजन बच्चों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें भारतीय साहित्य, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ते हैं। मुंशी प्रेमचंद जयंती पर आयोजित यह साहित्यिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव साबित हुआ।