प्रदर्शन के दौरान संदिग्धों को गिरफ्तार किया
मेरठ। मेरठ के कमिश्नरी चौराहे पर 8 जुलाई को हुए धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम के मामले में थाना सिविल लाइन पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 नामजद और 25 से 50 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मामले में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कार्य में बाधा, सड़क जाम, पुलिसकर्मियों पर हमला और सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक प्रचार-प्रसार किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
पुलिस के अनुसार, यह प्रदर्शन थाना टीपीनगर में दर्ज हत्या एवं एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे की विवेचना के विरोध में आयोजित किया गया था। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी और विभिन्न जनपदों से आए लोग कमिश्नरी चौराहे पर एकत्र हुए थे।
पुलिस का दावा- समझाने के बावजूद नहीं माने प्रदर्शनकारी
सूचना मिलने पर थाना सिविल लाइन पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा प्रदर्शनकारियों से कई बार शांति बनाए रखने और सार्वजनिक स्थान पर बिना अनुमति एकत्र न होने की अपील की गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दी और जिलाधिकारी कार्यालय में प्रवेश करने की कोशिश की।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान रवि गौतम नामक व्यक्ति ने आत्मदाह की धमकी देकर पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कमिश्नरी चौराहे पर यातायात अवरुद्ध कर दिया, जिससे आम लोगों, विद्यार्थियों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी हुई। पुलिस के मुताबिक दो एम्बुलेंस भी जाम में फंस गई थीं, जिन्हें बाद में सुरक्षित निकाला गया।
पुलिसकर्मियों पर हमले और महिला कर्मियों से अभद्रता का आरोप
मौके पर मौजूद अपर जिलाधिकारी नगर, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, नगर मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी कैंट, क्षेत्राधिकारी सिविल लाइन और थाना प्रभारी द्वारा प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई की।
पुलिस का दावा है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें 11 पुलिसकर्मी घायल हुए। साथ ही महिला पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके बाद कानून-व्यवस्था और यातायात बहाल करने के लिए पुलिस ने आवश्यक न्यूनतम बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया।
सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार का भी आरोप
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन सुबह लगभग 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक चला। इस दौरान सार्वजनिक और शासकीय कार्य बाधित हुए। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर जातिगत वैमनस्य फैलाने और पुलिस के खिलाफ लोगों को भड़काने वाली भ्रामक सामग्री प्रसारित की गई। सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया विश्लेषण के आधार पर अन्य लोगों की पहचान कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
थाना सिविल लाइन में मुकदमा संख्या 173/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा सीएल एक्ट की धारा 7 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
13 नामजद और 25-50 अज्ञात आरोपी
पुलिस ने रवि गौतम, सुशील गौतम, हिमांशु सिसौदिया, सागर, लवी प्रधान, बिजेंद्र गौतम, ऋतिक जाटव, मोहित जाटव, हेमंत प्रधान, संजय, बिजेंद्र सूद, दिग्विजय भाटी और अजय कुमार सहित 13 लोगों को नामजद किया है। इसके अतिरिक्त 25 से 50 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
7 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अंकित कुमार, अरविंद कुमार, रवि कुमार उर्फ गौतम, ऋतिक, नवनीत कुमार, हिमांशु सिद्धार्थ और लवि उर्फ शुभम को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ, नोएडा, हापुड़ और मुरादाबाद के निवासी शामिल हैं।
कुछ आरोपियों का आपराधिक इतिहास होने का दावा
पुलिस ने दावा किया है कि नामजद आरोपी दिग्विजय सिंह भाटी, रवि गौतम और ऋतिक के विरुद्ध पूर्व से विभिन्न जनपदों में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि दिग्विजय सिंह भाटी की घटनास्थल पर मौजूदगी इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से प्राप्त मोबाइल लोकेशन के आधार पर भी पुष्टि हुई है। अन्य आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
जांच जारी
पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और सोशल मीडिया विश्लेषण के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई जारी है।