पीतल नगरी मुरादाबाद में 150 रुपए से लेकर 900 रूपये तक के दियों और कलाकृतियों से होगी जगमग दीपावली
मुरादाबाद, 5 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच और ‘लोकल फॉर वोकल’ की नीति ने उत्तर प्रदेश के पारंपरिक शिल्पियों की जिंदगी बदल दी है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘एक जिला एक उत्पाद’, ‘माटी कला मेला’ और रेलवे के सहयोग से संचालित ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से मुरादाबाद का पीतल उद्योग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। दीवाली के पावन पर्व पर मुरादाबाद के पीतल के पारंपरिक दीयों, पूजा थालियों और मीनाकारी से सजे सजावटी उत्पादों की मांग प्रदेश से लेकर गुजरात तक पहुंच चुकी है।

मुरादाबाद के दौलतबाग निवासी 45 वर्षीय शिल्पकार अशरफ इसका जीवंत उदाहरण हैं। अशरफ यूं तो पिछले 15 वर्षों से इस धातु शिल्प से जुड़े थे, लेकिन उनके हुनर को असली पहचान, सम्मान और व्यावसायिक रफ्तार तब मिली, जब योगी सरकार ने मुरादाबाद के पीतल शिल्प को ओडीओपी में शामिल कर कारीगरों के लिए सरकारी मंचों के द्वार खोल दिए। कक्षा 8 तक पढ़े अशरफ ने 220 घंटे के एमएसएमई प्रशिक्षण से अपने काम को आधुनिक बाजार के अनुरूप ढाला और आज वे न केवल सालाना ₹3 लाख तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं, बल्कि 10 से 15 अन्य स्थानीय कारीगरों को भी नियमित आजीविका प्रदान कर रहे हैं।
15 वर्षों के हुनर को ओडीओपी ने दी वैश्विक पहचान और रफ्तार
मुरादाबाद के कारीगर अशरफ करीब डेढ़ दशक से पीतल की कारीगरी में लगे हुए थे, लेकिन पहले उनका दायरा बेहद सीमित था और बिचौलियों के अभाव में उचित बाजार नहीं मिल पाता था। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना उनके जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई। सरकार से सीधा जुड़ाव होते ही अशरफ को बड़े मेलों में निःशुल्क स्टॉल, रहने-खाने की सुविधा और राज्य स्तर पर पहचान मिली। ओडीओपी के माध्यम से ही उन्हें लखनऊ से 100 विशेष पूजा घंटियों का थोक ऑर्डर मिला, जबकि उनकी तैयार मीनाकारी कलाकृतियों की खेप गुजरात स्थित ओडीओपी स्टोर तक भी पहुंची। आज उन्हें देश भर से 50, 100 और 150 पीस के नियमित ऑर्डर मिल रहे हैं, जिसने उनके छोटे से काम को एक सशक्त उद्यम का रूप दे दिया है।
दीवाली पर पीतल के दीयों और मीनाकारी उत्पादों की भारी मांग
प्रकाश पर्व दीवाली को लेकर इस बार पीतल के पूजा उत्पादों का बाजार पूरी तरह गुलजार है। मेरठ में आयोजित माटी कला मेले में ग्राहकों की भारी भीड़ मुरादाबाद के पीतल के दीयों और सजावटी सामानों की ओर आकर्षित हो रही है। मेले में आमजन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ₹150 और ₹250 के छोटे दीयों से लेकर ₹450 के मध्यम कलात्मक दीये, ₹200 की पूजा घंटियां और ₹900 की भव्य नक्काशीदार थालियां व कलाकृतियां उपलब्ध हैं। पीतल की ठोस धातु पर चटख रंगों और मीनाकारी का यह संगम घरों और मंदिरों में पूजन के लिए श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है, जिसकी सीधी बिक्री से कारीगरों के चेहरे खिले हुए हैं।

भट्टी की तपिश से लेकर मीना के रंगों तक—ऐसे संवरती है पीतल नगरी की कला
मुरादाबाद के इन आकर्षक उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया बेहद जटिल और शत-प्रतिशत हस्तशिल्प पर आधारित है। सर्वप्रथम उच्च तापमान वाली भट्टियों में पीतल को पिघलाकर दीयों, थालियों और कटोरों की ढलाई की जाती है। ढलाई के बाद धातु को विशेष तकनीक से तपाकर उस पर उभारदार (एम्बॉस) नक्काशी उकेरी जाती है। इसके पश्चात कुशल कारीगर अपने हाथों से इसमें पारंपरिक मीना के चटख रंग भरते हैं। रंग भरने के बाद धातु की कथाई और बारीक छिलाई की जाती है, ताकि नक्काशी की हर रेखा स्पष्ट दिखे। अंत में एमरी और आधुनिक पॉलिशिंग के जरिए इसमें शीशे जैसी चमक लाई जाती है, जो मुरादाबाद के पीतल उत्पादों को दुनिया भर में बेजोड़ बनाती है।
माटी कला मेले में धातु शिल्प को मिला विशेष मंच
उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा आयोजित सात दिवसीय माटी कला मेला (1 से 7 नवंबर) पारंपरिक कारीगरों के लिए सशक्त विपणन मंच साबित हो रहा है। मेले के 24 से 25 स्टॉलों के बीच मुरादाबाद के पीतल शिल्प को विशेष रूप से स्थान दिया गया है, ताकि मिट्टी के दीयों के साथ-साथ धातु शिल्प के उत्पादों को भी त्योहारों पर सीधा उपभोक्ता आधार मिल सके। योगी सरकार की ओर से कारीगरों को यह स्टॉल पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किए गए हैं, जिससे शिल्पियों को बिना किसी वित्तीय बोझ के अपने उत्पादों का सर्वश्रेष्ठ मूल्य सीधे ग्राहकों से प्राप्त हो रहा है।
रेलवे स्टेशन के ₹5 लाख वाले आधुनिक कियोस्क पर 700 से अधिक आवेदनों की होड़
केंद्र और प्रदेश सरकार के समन्वय से शुरू हुई ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ योजना ने मुरादाबाद में सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या-1 पर स्थापित ₹5 लाख की लागत वाले भव्य और आधुनिक कियोस्क पर पहला स्टॉल लगाने का अवसर अशरफ को ही मिला था। मात्र ₹2,000 के मामूली शुल्क पर उपलब्ध इस प्लेटफॉर्म ने मुरादाबाद के शिल्प को सीधे रेल यात्रियों के बड़े बाजार से जोड़ दिया। इस योजना की अभूतपूर्व सफलता और लोकप्रियता का प्रमाण यह है कि शुरुआत में जहां मात्र 10 कारीगरों ने आवेदन किया था, वहीं आज इस आधुनिक कियोस्क पर स्टॉल पाने के लिए 700 से अधिक शिल्पियों की पर्चियां डाली जा रही हैं। यह भारी उत्साह दर्शाता है कि योगी सरकार के प्रयासों से कारीगरों के मन में अपने उत्पाद को बेचने का नया विश्वास जागा है।

15 कारीगरों की रोज़ी-रोटी और सालाना ₹3 लाख तक की आमदनी
मुरादाबाद के दौलतबाग निवासी अशरफ के कारोबार की मजबूती का लाभ उनके साथ जुड़े दर्जनों परिवारों को मिल रहा है। किसी भी बड़े मेले या प्रदर्शनी में वे लगभग ₹50,000 की लागत का उत्पाद लेकर जाते हैं, जिस पर उन्हें ₹25,000 और ₹35,000 तक का सीधा शुद्ध मुनाफा होता है। उनकी सालाना आमदनी अब ₹2.5 लाख से ₹3 लाख तक पहुंच चुकी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अशरफ के साथ ढलाई, छिलाई, एमरी, पॉलिश और मीनाकारी का काम करने वाले 10 से 15 अन्य स्थानीय कारीगरों को भी साल भर नियमित रोजगार और आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।
220 घंटे के प्रशिक्षण से मिली राष्ट्रीय पुरस्कारों की प्रेरणा
शिल्पकार अशरफ ने जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से मुरादाबाद के पीतल नगरी केंद्र पर 220 घंटे का विधिवत एमएसएमई प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, आधुनिक फिनिशिंग और राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कारों के तकनीकी मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई। मुरादाबाद के पद्मश्री विजेता शिल्पकारों—दिलशाद हुसैन, चिरंजीलाल की गौरवशाली परंपरा से प्रेरणा लेते हुए अशरफ अब अपने काम को राज्य और राष्ट्रीय स्तर के सम्मान तक पहुंचाने तथा आगामी पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से इसे और बड़े पैमाने पर विस्तार देने के लिए पूरी तरह से उत्साहित है।