राष्ट्रीय लोक अदालत कार्यक्रम को संबोधित करते जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद कुमार मिश्रा
सुलह-समझौते के आधार पर 6,77,349 मामलों का निपटारा, 44.01 करोड़ रुपये से अधिक की अर्थदंड एवं समझौता धनराशि
मेरठ। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में शनिवार, 12 सितंबर 2026 को मेरठ में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। जिला न्यायालय मेरठ के साथ-साथ बाह्य न्यायालयों तथा तहसील सरधना और मवाना में भी लोक अदालत आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ श्री अरविन्द कुमार मिश्रा-II ने की। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अरविन्द कुमार मिश्रा-II द्वारा रीबन काटकर तथा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित और पुष्प अर्पित कर किया गया। लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों, विभागों और प्री-लिटिगेशन स्तर के मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।
6,77,349 वादों का हुआ निस्तारण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 6,77,349 वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में अर्थदंड, प्रतिकर और समझौते की धनराशि सहित कुल 44,01,85,647 रुपये की धनराशि प्रदान की गई। जिला प्रशासन मेरठ की ओर से राजस्व, फौजदारी, श्रम, बैंकिंग तथा अन्य प्री-लिटिगेशन मामलों का भी बड़ी संख्या में निस्तारण किया गया। जिला प्रशासन द्वारा कुल 5,92,499 राजस्व, फौजदारी, श्रम, बैंकिंग एवं अन्य प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में समझौते के रूप में 7,81,00,000 रुपये प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त सेतु एप के माध्यम से भी 1,99,150 रुपये जमा किए गए।
मोटर दुर्घटना प्रतिकर के 214 मामलों में करोड़ों रुपये का समझौता
राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना प्रतिकर दावा अधिकरण के मामलों का भी बड़ी संख्या में निस्तारण किया गया। मोटर दुर्घटना प्रतिकर दावा अधिकरण उत्तर क्षेत्र, मेरठ के पीठासीन अधिकारी श्री शैलेन्द्र पाण्डेय द्वारा 156 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में 15,78,15,000 रुपये समझौते के रूप में प्रदान किए गए। वहीं मोटर दुर्घटना प्रतिकर दावा अधिकरण दक्षिण क्षेत्र, मेरठ के पीठासीन अधिकारी श्री अहसान हुसैन द्वारा 58 मोटर दुर्घटना प्रतिकर वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 5,19,90,000 रुपये प्रतिकर के रूप में प्रदान किए गए।
परिवार न्यायालयों में वैवाहिक विवादों का समाधान
लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालयों में भी बड़ी संख्या में वैवाहिक विवादों का निस्तारण किया गया। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय, मेरठ श्री शक्ति पुत्र तोमर द्वारा 84 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया तथा 14 मामलों में पति-पत्नी को आपसी सुलह के बाद साथ भेजा गया। अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय संख्या-01, मेरठ श्रीमती मीता सिंह द्वारा 61 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया। इनमें सात मामलों में पति-पत्नी को साथ-साथ भेजा गया और 2,13,900 रुपये समझौते के रूप में प्रदान कराए गए। परिवार न्यायालय संख्या-02 की अपर प्रधान न्यायाधीश श्रीमती पारूल वर्मा द्वारा 14 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया तथा चार मामलों में पति-पत्नी को साथ भेजा गया।
वाणिज्यिक और उपभोक्ता मामलों का भी निपटारा
वाणिज्यिक न्यायालय संख्या-01 के पीठासीन अधिकारी श्री क्षितिज कुमार श्रीवास्तव द्वारा छह वादों का निस्तारण किया गया। वाणिज्यिक न्यायालय संख्या-02 के पीठासीन अधिकारी श्री अशोक कुमार-X द्वारा 12 वादों का निस्तारण करते हुए 45,75,295 रुपये समझौते की राशि के रूप में प्रदान किए गए। उपभोक्ता न्यायालय, मेरठ के पीठासीन अधिकारी श्री भोपाल सिंह द्वारा 19 वादों का निस्तारण किया गया तथा 29,00,219 रुपये सुलह धनराशि के रूप में प्रदान किए गए। भूमि-अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण के पीठासीन अधिकारी श्री नित्यानंद श्रीनेत द्वारा चार मामलों का निस्तारण किया गया।
हजारों आपराधिक एवं अन्य मामलों का निस्तारण
लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों द्वारा बड़ी संख्या में आपराधिक एवं अन्य मामलों का भी निस्तारण किया गया। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट श्री चन्द्रशेखर द्वारा 844 वादों का निस्तारण किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री नीरज कुशवाह द्वारा 3,770 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती नाहिद सुल्ताना द्वारा 3,286 वादों का निस्तारण किया गया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या-01 की श्रीमती न्रमता सिंह द्वारा 4,640 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में 75,350 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। मवाना स्थित सिविल जज (जू.डि.) श्री प्रशान्त मौर्या द्वारा 318 मामलों का निस्तारण किया गया तथा 4,33,153 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। सरधना के सिविल जज (जू.डि.) श्री प्रवीन द्वारा 961 मामलों का निस्तारण किया गया तथा 21,870 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
विभिन्न विशेष न्यायालयों में भी हुए निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान विशेष न्यायालयों में भी मामलों का निस्तारण किया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत श्री अमित वीर सिंह द्वारा एक वाद का निस्तारण करते हुए 23,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट न्यायालय संख्या-02 की श्रीमती रीमा मल्होत्रा द्वारा दो वादों का निस्तारण किया गया और कुल 1,000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। पोक्सो एक्ट न्यायालय संख्या-01 की श्रीमती शिवानी सिंह-I द्वारा दो मामलों का निस्तारण करते हुए 2,000 रुपये का अर्थदंड किया गया। पोक्सो एक्ट न्यायालय संख्या-03 के श्री यशपाल सिंह लोधी द्वारा तीन मामलों का निस्तारण किया गया और 1,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार अधिनियम न्यायालय संख्या-01 के श्री आलोक द्विवेदी द्वारा तीन वादों का निस्तारण किया गया, जिसमें 2,500 रुपये समझौते के रूप में प्रदान किए गए। भ्रष्टाचार अधिनियम न्यायालय के श्री रितेश सचदेवा द्वारा दो वादों का निस्तारण किया गया और 200 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। गैंगस्टर एक्ट न्यायालय संख्या-04 के श्री अजय कुमार-I द्वारा पांच वादों का निस्तारण किया गया तथा 12,000 रुपये समझौते की राशि के रूप में प्रदान किए गए। त्वरित न्यायालय संख्या-01 के श्री अभय प्रताप सिंह-II द्वारा तीन वादों का निस्तारण किया गया।

जिला जज ने लोक अदालत के स्टॉलों का किया निरीक्षण
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला न्यायालय परिसर में विभिन्न विभागों की ओर से स्टॉल भी लगाए गए। जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री अरविन्द कुमार मिश्रा-II, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत श्री अमित वीर सिंह तथा प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती प्रियंका रानी ने न्यायालय परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न संस्थानों से आए विधि छात्रों को भी लोक अदालत की कार्यप्रणाली और इसके महत्व के बारे में जानकारी दी गई। शोभित विश्वविद्यालय, आईआईएमटी लॉ कॉलेज, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, दीवान लॉ कॉलेज, सुभारती विश्वविद्यालय तथा काईट लॉ कॉलेज के विधि छात्र लोक अदालत की कार्यवाही से जुड़े।
दिव्यांग दंपती का मामला कराया गया निस्तारित
लोक अदालत के निरीक्षण के दौरान दो दिव्यांग दंपती भी अपनी समस्या लेकर पहुंचे। जिला न्यायाधीश श्री अरविन्द कुमार मिश्रा-II ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वयं पहल की और प्रोत्साहित करते हुए संबंधित मामले का निस्तारण कराने में सहयोग किया। बताया गया कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा लोक अदालत के माध्यम से मामले का निस्तारण कराया गया।
पहली बार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के क्यूआर कोड से हुआ एनआई एक्ट का निस्तारण
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार इस बार मेरठ में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान एक महत्वपूर्ण पहल भी की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ के अनुसार जनपद में पहली बार धारा 138 एनआई एक्ट से संबंधित एक वाद का निस्तारण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बैंक खाते के क्यूआर कोड के माध्यम से किया गया। इस पहल को लोक अदालत की प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इसके साथ ही लोक अदालत के अवसर पर लोगों की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया गया।
सुलह-समझौते से विवादों के समाधान पर जोर
राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों और प्री-लिटिगेशन विवादों को आपसी सहमति एवं सुलह-समझौते के आधार पर शीघ्र निस्तारित करना रहा। लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों के निस्तारण से पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिली और आपसी सहमति से विवादों का समाधान किया गया। मेरठ में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों, जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों, अधिवक्ताओं, बैंकिंग संस्थानों, विधि छात्रों तथा सामाजिक स्तर पर जुड़े लोगों की भागीदारी रही। 6,77,349 मामलों का निस्तारण और 44,01,85,647 रुपये की अर्थदंड एवं समझौता धनराशि लोक अदालत की व्यापक पहुंच और सुलह-समझौते के माध्यम से विवादों के समाधान की दिशा में किए गए प्रयासों को दर्शाती है।