कार्यक्रम के दौरान तीन पुस्तकों का किया गया विमोचन
पूर्व छात्राओं ने बोतल पेंटिंग और अपशिष्ट सामग्री को कलात्मक रूप देने की तकनीक सिखाई, कनाडा में रह रहीं पूर्व छात्रा डॉ. गीता शर्मा से हुआ संवाद
मेरठ । महाविद्यालय के चित्रकला विभाग द्वारा एम.ए. की छात्राओं के लिए विशेष व्यावहारिक एवं संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को चित्रकला के व्यावहारिक प्रयोगों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें रचनात्मकता, नवाचार और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा।
पूर्व छात्राओं ने कराया बोतल पेंटिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान विभाग की पूर्व छात्राओं सुश्री राखी एवं सुश्री सृष्टि ने एम.ए. की छात्राओं को बोतल एवं विभिन्न प्रकार की अपशिष्ट सामग्री पर चित्रकला के व्यावहारिक प्रयोग की जानकारी दी। दोनों पूर्व छात्राओं ने छात्राओं के समक्ष बोतल पेंटिंग का जीवंत प्रदर्शन किया और बताया कि किस प्रकार अनुपयोगी अथवा अपशिष्ट सामग्री को रचनात्मक सोच के माध्यम से आकर्षक कलाकृति में परिवर्तित किया जा सकता है। इस व्यावहारिक सत्र के माध्यम से छात्राओं को पारंपरिक चित्रकला के साथ-साथ रचनात्मक पुनःउपयोग की अवधारणा से भी परिचित होने का अवसर मिला। छात्राओं ने प्रदर्शन को रुचिपूर्वक देखा और चित्रकला की तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझा।
कनाडा में रह रहीं पूर्व छात्रा डॉ. गीता शर्मा से हुआ प्रेरणादायी संवाद
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण महाविद्यालय की पूर्व छात्रा डॉ. गीता शर्मा के साथ छात्राओं का संवाद रहा। डॉ. गीता शर्मा वर्तमान में कनाडा में निवास करती हैं। उन्होंने छात्राओं से सीधे संवाद करते हुए अपने अनुभव साझा किए और कला के क्षेत्र में निरंतर सीखने, प्रयोग करने तथा अपनी रचनात्मक क्षमता को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. शर्मा के साथ संवाद छात्राओं के लिए विशेष एवं प्रेरणादायी अवसर रहा। उनके अनुभवों और विचारों ने छात्राओं में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार किया। संवाद के दौरान कला को केवल अध्ययन का विषय न मानकर उसे अभिव्यक्ति, सृजन और समाज से जुड़ने का माध्यम बनाने पर भी जोर दिया गया।
कविता और चित्रकला के संगम पर आधारित पुस्तकों की जानकारी
डॉ. गीता शर्मा ने कविता और चित्रकला के संगम पर आधारित तीन पुस्तकों का लेखन किया है। कार्यक्रम के दौरान उनके नवीनतम चित्र-संग्रह ‘मंथन’ का विभाग में विमोचन भी किया गया। इस चित्र-संग्रह में कविता और कलाकृतियों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया है। ‘मंथन’ के माध्यम से साहित्य और दृश्य कला के बीच संबंध को रचनात्मक रूप में सामने लाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक के विमोचन ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया और छात्राओं को कला के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर मिला।
प्रो. अर्चना ने किया डॉ. गीता शर्मा का स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रो. अर्चना ने डॉ. गीता शर्मा का स्वागत किया और महाविद्यालय तथा चित्रकला विभाग से उनके जुड़ाव एवं योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने छात्राओं के लिए इस प्रकार के व्यावहारिक और संवादात्मक कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया।
विभिन्न प्रकोष्ठों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन
यह कार्यक्रम चित्रकला विभाग द्वारा रबींद्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक क्लब, भारतीय भाषा, संस्कृति एवं कला सेल, आरजीपीजी नवाचार सेल तथा करियर एंड काउंसलिंग सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। आयोजन में विभागीय शिक्षकों एवं संबंधित प्रकोष्ठों की सक्रिय सहभागिता रही।
आयोजन को सफल बनाने में इनकी रही भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. पूनम लता सिंह, डॉ. गरिमा कुमारी, डॉ. हीना यादव एवं इंशा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को व्यावहारिक कला प्रशिक्षण, रचनात्मक प्रयोग और अनुभवी पूर्व छात्रा के साथ संवाद—तीनों का अवसर एक साथ मिला।
कला शिक्षा के साथ रचनात्मक सोच को बढ़ावा
कार्यक्रम ने छात्राओं को यह संदेश दिया कि कला के क्षेत्र में सफलता के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ रचनात्मक सोच, निरंतर अभ्यास और नए प्रयोगों के प्रति रुचि भी आवश्यक है। अपशिष्ट सामग्री को कलात्मक रूप देने जैसे प्रयोगों से छात्राओं को अपनी कल्पनाशीलता को व्यावहारिक रूप देने का अवसर मिला। कार्यक्रम के संबंध में मीडिया प्रभारी प्रोफेसर सुनीता एवं डॉ. पूनम लता की ओर से जानकारी दी गई। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर निवेदिता कुमारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्राओं को कला, साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न आयामों से जोड़ने का कार्य किया।