स्थापित करने से पूर्व स्कैनर मशीन का ट्रायल लेते वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ वीरेश राज शर्मा
मैन्युअल तलाशी से मिलेगी निजात, बिना बैग खोले दिखाई देगा सामान का एक्स-रे; बंदियों के लिए बढ़ेंगे बेकरी उत्पादन और आय के अवसर
मेरठ । चौधरी चरण सिंह जिला कारागार अब पुराने तौर-तरीकों से निकलकर आधुनिक और हाईटेक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। जेल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ बंदियों के लिए रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी नई पहल की गई है। शासन की ओर से जिला कारागार को करीब 18 लाख रुपये कीमत का एक्स-रे बैगेज स्कैनर उपलब्ध कराया गया है। वहीं, मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद अरुण गोविल की निधि से करीब 20 लाख रुपये की अत्याधुनिक बेकरी मशीन जेल को मिली है। इन दोनों मशीनों के शुरू होने के बाद जिला कारागार में सुरक्षा जांच की प्रक्रिया जहां पहले के मुकाबले तेज और आधुनिक होगी, वहीं बेकरी उत्पादों के निर्माण में भी उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे बंदियों के काम का बोझ कम होने के साथ तैयार होने वाले उत्पादों की मात्रा बढ़ सकती है और उनकी आय में भी इजाफा हो सकता है।

अब मैन्युअल तलाशी के बजाय मशीन से होगी सामान की जांच
चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बंदियों से मुलाकात करने के लिए उनके परिजन पहुंचते हैं। इसके अलावा जेल स्टाफ और अन्य अधिकृत लोगों को भी आवश्यक जांच के बाद ही परिसर में प्रवेश दिया जाता है। अब तक आने वाले लोगों के बैग और अन्य सामान की तलाशी मैन्युअल तरीके से की जाती थी। कर्मचारियों को बैग खोलकर उसके अंदर रखी वस्तुओं की जांच करनी पड़ती थी। इस प्रक्रिया में अधिक समय और मैनपावर दोनों लगते थे। साथ ही बड़ी संख्या में लोगों के आने पर तलाशी प्रक्रिया को पूरा करने में अतिरिक्त समय भी लगता था। जेल प्रशासन लंबे समय से आधुनिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर की आवश्यकता महसूस कर रहा था। अब शासन की ओर से स्कैनर उपलब्ध कराए जाने के बाद इस समस्या का समाधान होने जा रहा है।
मुख्य प्रवेश द्वार के पास तैयार हुआ विशेष कैबिन
एक्स-रे बैगेज स्कैनर को जेल के मुख्य प्रवेश द्वार के बाईं ओर तैयार किए गए विशेष कैबिन में स्थापित किया गया है। मशीन को लगाने के लिए करीब 10×14 फीट का कैबिन तैयार कराया गया है। इसी स्थान से प्रशिक्षित कर्मचारी स्कैनर का संचालन और निगरानी करेंगे। फिलहाल कंपनी की ओर से जेल कर्मचारियों को मशीन के संचालन की शुरुआती ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मशीन की पूरी जिम्मेदारी जिला कारागार प्रशासन को सौंपे जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
स्कैनर के सामने आते ही होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
नई व्यवस्था में सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केवल सामान की स्कैनिंग ही नहीं, बल्कि स्कैनर के सामने आने वाले व्यक्ति की वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार रिकॉर्डिंग को करीब एक महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा। व्यक्ति के सामान को स्कैनर में रखते ही उसके अंदर मौजूद वस्तुओं की एक्स-रे इमेज स्क्रीन पर दिखाई देगी। इससे सुरक्षा में तैनात कर्मचारी बिना बैग खोले ही उसके अंदर रखी वस्तुओं की जांच कर सकेंगे और किसी प्रतिबंधित या संदिग्ध वस्तु की पहचान करने में मदद मिलेगी।

एयरपोर्ट और बड़े मॉल जैसी तकनीक अब जेल में
जेल अधिकारियों के मुताबिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर जैसी अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल आमतौर पर एयरपोर्ट, बड़े मॉल और प्रमुख सरकारी संस्थानों में सुरक्षा जांच के लिए किया जाता है। अब इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल जिला कारागार की सुरक्षा व्यवस्था में किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बड़ी संख्या में मुलाकातियों के सामान की जांच अपेक्षाकृत कम समय में की जा सकेगी। इससे मैन्युअल तलाशी पर निर्भरता कम होगी और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
संदिग्ध वस्तुओं की पहचान में मिलेगी मदद
एक्स-रे स्कैनर के जरिए बैग के अंदर रखी वस्तुओं की तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई देगी। इससे सुरक्षा कर्मियों को संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करने में मदद मिलेगी। खाद्य सामग्री समेत विभिन्न सामान की भी मशीन के जरिए जांच की जा सकेगी। जेल प्रशासन का मानना है कि आधुनिक स्कैनिंग व्यवस्था लागू होने से सुरक्षा में मानवीय स्तर पर होने वाली चूक की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी और प्रवेश प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।
बंदियों के रोजगार को भी मिलेगी नई रफ्तार
सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाने के साथ जिला कारागार प्रशासन ने बंदियों के लिए रोजगार और आय बढ़ाने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। सांसद अरुण गोविल की निधि से करीब 20 लाख रुपये की अत्याधुनिक बेकरी मशीन जिला कारागार को उपलब्ध कराई गई है। नई मशीन के आने से जेल में संचालित बेकरी का काम पारंपरिक भट्ठी और अधिक मैन्युअल मेहनत पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक मशीनरी के जरिए किया जा सकेगा।

भट्ठी की मेहनत से मशीन की रफ्तार तक पहुंचा बेकरी कारोबार
जिला कारागार में अभी तक बेकरी का काम मुख्य रूप से भट्ठी के सहारे किया जाता था। इसमें बंदियों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी और उत्पादन में भी अपेक्षाकृत अधिक समय लगता था। मैन्युअल प्रक्रिया होने के कारण सीमित मात्रा में ही बेकरी उत्पाद तैयार किए जा पाते थे। अत्याधुनिक मशीन के इस्तेमाल से अब कम समय और कम मेहनत में अधिक मात्रा में उत्पाद तैयार किए जाने की संभावना है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ बेकरी के काम को व्यवस्थित और व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
ब्रेड के साथ बढ़ेगा बेकरी उत्पादों का दायरा
जिला कारागार में अब तक मुख्य रूप से ब्रेड तैयार किए जाने की जानकारी है। नई मशीन के आने के बाद बेकरी उत्पादों का दायरा बढ़ाने की योजना है। इसमें विभिन्न प्रकार के बिस्कुट, ब्रेड, रस्क और अन्य बेकरी उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। उत्पादों की विविधता बढ़ने से जेल की बेकरी को अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने और बिक्री बढ़ाने के अवसर भी बढ़ेंगे।

अधिक उत्पादन से बढ़ सकती है बंदियों की आय
नई बेकरी मशीन का फायदा केवल उत्पादन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन क्षमता बढ़ने पर अधिक मात्रा में बेकरी उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। इससे बिक्री बढ़ने की संभावना है और परिणामस्वरूप बंदियों को मिलने वाली आय में भी वृद्धि हो सकती है। इस तरह जिला कारागार में लाई गई नई मशीनें दो अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत कर रही हैं। एक ओर एक्स-रे बैगेज स्कैनर जेल की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मदद करेगा, वहीं अत्याधुनिक बेकरी मशीन बंदियों के लिए रोजगार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।
सुरक्षा और आत्मनिर्भरता—दोनों पर जोर
जिला कारागार में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की यह पहल सुरक्षा व्यवस्था के साथ बंदियों के पुनर्वास और रोजगार की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक्स-रे स्कैनर से जहां प्रवेश के दौरान सामान की जांच अधिक व्यवस्थित होगी, वहीं बेकरी मशीन से बंदियों को आधुनिक मशीनों के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा। नई व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद जेल प्रशासन को उम्मीद है कि सुरक्षा जांच की प्रक्रिया तेज होगी और बेकरी उत्पादन में भी पहले की तुलना में अधिक क्षमता विकसित होगी। इससे जिला कारागार की कार्यप्रणाली में तकनीकी बदलाव के साथ बंदियों के लिए रोजगार आधारित गतिविधियों को भी नई दिशा मिल सकती है।