त्रिलोकपुरी में जनसुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी एवं योगेंद्र यादव
जनसुनवाई में दावा—हटाए गए नामों में ऐसे लोग भी शामिल, जिनके नाम मतदाता सूची से नहीं कटने चाहिए थे; मामले की जांच और प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
पूर्वी दिल्ली । त्रिलोकपुरी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आयोजित जनसुनवाई में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठे। जनसुनवाई में दावा किया गया कि केवल चार बूथों पर जांच के दौरान हटाए गए नामों में 416 ऐसे लोग मिले, जिनके नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जाने चाहिए थे।
इस दावे के सामने आने के बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नाम हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चिंता जताई गई। जनसुनवाई में सवाल उठाया गया कि यदि सीमित जांच में इतनी बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं, तो अन्य क्षेत्रों में भी प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए।
जांच और पारदर्शिता की मांग
जनसुनवाई में यह सवाल भी उठाया गया कि मतदाता सूची से नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाताओं की जानकारी और दस्तावेजों का उचित सत्यापन किया गया या नहीं। ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर देने की जरूरत पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने निर्वाचन आयोग से नाम हटाने से जुड़े मामलों की जांच कराने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की। उनका कहना था कि मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम बने रहना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए आवश्यक है। किसी भी नाम को हटाने के मामले में स्पष्ट कारण और उचित जांच सुनिश्चित होनी चाहिए।
व्यापक स्तर पर उठे सवाल
जनसुनवाई में उठे मुद्दे के बाद यह सवाल सामने आया कि त्रिलोकपुरी के चार बूथों पर की गई जांच में 416 नामों को लेकर आपत्ति दर्ज हुई है, तो अन्य बूथों और क्षेत्रों में स्थिति की समीक्षा कैसे की जा रही है। आयोजन में इसे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बताते हुए संबंधित अधिकारियों से तथ्य जांचने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई।
यह संख्या जनसुनवाई में सामने आए दावे पर आधारित है। उपलब्ध जानकारी में निर्वाचन आयोग या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। दावे की पुष्टि और संबंधित मतदाता सूची की स्थिति स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक जांच तथा प्रभावित लोगों का पक्ष सामने आना जरूरी होगा।