महा अष्टमी पर बंगाली दुर्गाबाड़ी में संधि पूजा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
220वें दुर्गा पूजा महोत्सव में पूजा-अर्चना और बंगाली परंपराओं का संगम
मेरठ । बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति, मेरठ में 220वें दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को महा अष्टमी श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाई गई। सुबह से ही मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और जयकारों के बीच भक्तों ने पुष्पांजलि अर्पित कर परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि, शांति एवं कल्याण की कामना की।
महा अष्टमी के धार्मिक आयोजनों के साथ इस वर्ष महोत्सव में बंगाली समाज की सांस्कृतिक परंपराओं को भी मंच मिला। बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति की सांस्कृतिक शाखा फ्रेंड्स यूनियन ड्रामेटिक क्लब (एफयूडीसी) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं।

सुबह हुई पूजा और पुष्पांजलि
महा अष्टमी के अवसर पर सुबह पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने मां को पुष्पांजलि अर्पित कर उनका स्मरण किया। समिति के अनुसार, महा अष्टमी बंगाली दुर्गा पूजा का महत्वपूर्ण दिन है, जब भक्त मां दुर्गा के शक्ति और साहस के स्वरूप की आराधना करते हैं।

संधि पूजा में चंडी पाठ और दीप प्रज्ज्वलन
महोत्सव का प्रमुख धार्मिक आयोजन संधि पूजा रहा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पूजा महा अष्टमी की अंतिम 24 मिनट और महानवमी की शुरुआती 24 मिनट—कुल 48 मिनट के संधिकाल में की जाती है। मान्यता है कि इसी समय मां दुर्गा ने चंड और मुंड नामक असुरों के संहार के लिए चामुंडा का स्वरूप धारण किया था।
संधि पूजा में चंडी पाठ और विशेष मंत्रोच्चार के साथ 108 दीप प्रज्ज्वलित करने की परंपरा है। शंखध्वनि और धाक की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने मां की आराधना की। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि यह अनुष्ठान बंगाली समाज की आस्था, सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा है।

रात 9:30 बजे हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम
सोमवार रात 9:30 बजे एफयूडीसी की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। “संगीत समाज” म्यूजिक कॉलेज के कलाकारों ने संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला परंपरा की झलक पेश की। आयोजन का उद्देश्य दुर्गा पूजा के धार्मिक उल्लास के साथ संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना रहा।
संगीत समाज म्यूजिक कॉलेज की प्रधानाचार्या रुचिका सिंह के मार्गदर्शन में संस्थान के कलाकारों और प्रशिक्षकों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। इनमें भरतनाट्यम गुरु रुपम शर्मा, कथक गुरु स्वाति नौटियाल, वादन गुरु सौरभ सिंह और गायन गुरु भव्या जायसवाल शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रितु अग्रवाल ने किया।

समिति के अनुसार, एफयूडीसी लंबे समय से नाट्यकला, संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से मेरठ में कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहित कर रहा है। महोत्सव में ऐसी प्रस्तुतियां बंगाली सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को मजबूत करने का अवसर बनीं।
समिति पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
समिति अध्यक्ष अमिताभ मुखर्जी ने महा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महा अष्टमी और संधि पूजा मां दुर्गा की शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 220 वर्षों से चली आ रही परंपरा धार्मिक आस्था के साथ समिति की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को भी दर्शाती है।

महासचिव अभय मुखर्जी ने कहा कि 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव समिति के लिए गौरव और भावनात्मक जुड़ाव का अवसर है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक पूजा-विधियों, सांस्कृतिक आयोजनों और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
पूजा सचिव सुब्रोतो विश्वास ने संधि पूजा को बंगाली दुर्गा पूजा की आध्यात्मिक आत्मा बताते हुए कहा कि इस दौरान श्रद्धालु मां के दिव्य स्वरूप का स्मरण कर शक्ति, साहस और कल्याण की कामना करते हैं। उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा के संचार की कामना की।

समिति सदस्यों और स्वयंसेवकों का सहयोग
महा अष्टमी के आयोजन और व्यवस्थाओं में समिति पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों और स्वयंसेवकों ने सहयोग किया। अजय मुखर्जी, डॉ. सुब्रोतो सेन, संतोश्री विश्वास, जूही दत्ता, अभिनव दत्ता, प्रदीप मुखर्जी, नोबेंदु राय चौधरी, विश्वजीत विश्वास और संजय बैनर्जी सहित अन्य सदस्य आयोजन में शामिल रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़े कलाकारों, प्रशिक्षकों और सहयोगियों ने भी महोत्सव को सफल बनाने में योगदान दिया।

बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति का 220वां दुर्गा पूजा महोत्सव मेरठ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। महा अष्टमी की पूजा, संधि पूजा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस आयोजन में भक्ति, कला और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़ा। समिति ने श्रद्धालुओं और नगरवासियों का आभार जताते हुए महोत्सव के आगामी आयोजनों में शामिल होने की अपील की।
जय मां दुर्गा! शुभो महा अष्टमी!