वैज्ञानिकों ने किसानों को रवि फसलों की उन्नत तकनीकी बताइ
मेरठ। #ANN सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी ‘कृषि कुंभ’ के दूसरे दिन किसान मेले और मंडलीय रबी गोष्ठी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शनमुग सुंदरम ने किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के निदेशक सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान और उद्यमी मौजूद रहे।

किसानों को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव ने कहा कि किसान मेला देश के दूरदराज क्षेत्रों से आए किसानों और कृषि उद्यमियों को वैज्ञानिकों से बातचीत करने तथा अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने का अवसर देता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के योगदान और उपलब्धियों को पहचान देना, सफल कृषि पद्धतियों को साझा करना और टिकाऊ, उत्पादक तथा आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
उन्नत बीज और तकनीक से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों के साथ मिलकर उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्नत बीज उत्पादन के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने किसानों को 7,000 कुंतल बीज उपलब्ध कराए हैं।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य खेती को केवल उत्पादन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि विज्ञान, नवाचार, तकनीक, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़कर किसानों की आय तथा जीवन स्तर में सुधार लाना है। विश्वविद्यालय के कार्यक्षेत्र के 18 जिलों में 20 कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित हैं। इनके माध्यम से 104 कृषक उत्पादक संगठनों के 56 हजार से अधिक सदस्यों को तकनीकी सहायता दी जा रही है। इनमें से 68 कृषक उत्पादक संगठन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से लाइसेंस प्राप्त हैं, जबकि पांच संगठन अपने उत्पाद विदेशों में भी निर्यात कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. सतेंद्र कुमार ने बताया कि मेले के दूसरे दिन बड़ी संख्या में किसान और स्कूली विद्यार्थी पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनी का भ्रमण कर खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों और जानकारियों के बारे में जानकारी ली।
रबी फसलों, मिट्टी और गन्ने की खेती पर वैज्ञानिकों ने दी जानकारी
किसान मेले के मुख्य पंडाल में किसान गोष्ठी और चौपाल का आयोजन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने रबी फसलों की उन्नत किस्मों और बीज उत्पादन पर डॉ. लोकेश गंगवार, रबी फसलों में खरपतवार नियंत्रण पर डॉ. राजेश कुमार तथा मृदा स्वास्थ्य और केंचुआ पालन पर डॉ. एस.पी. सिंह ने जानकारी दी।
गन्ने की खेती में टपक सिंचाई पद्धति के लाभों पर डॉ. चित्रा शुक्ला और गन्ने की फसल में कीट प्रबंधन पर डॉ. गजे सिंह ने किसानों को बताया। विशेषज्ञों ने खेती में आधुनिक तरीकों को अपनाने, फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई करने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने की उपयोगिता समझाई। इस दौरान क्रिस्टल फॉस्फेट कंपनी की ओर से डॉ. पी.के. पांडेय के संयोजन में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कराई गई। विजेता किसानों को पुरस्कृत किया गया।

मिट्टी का कार्बन घटने पर जताई चिंता
प्रमुख सचिव डॉ. शनमुग सुंदरम ने कुलपति, निदेशकों, अधिष्ठाताओं और विभागाध्यक्षों के साथ संवाद कर विश्वविद्यालय में चल रही शिक्षण, शोध और प्रसार गतिविधियों की समीक्षा की। कुलपति ने विश्वविद्यालय के कार्यों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी।
प्रमुख सचिव ने कहा कि वर्ष 1965 में हरित क्रांति के बाद पीली, श्वेत और नीली क्रांतियों ने देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में भूमिका निभाई। उनके अनुसार, 1947 में देश का खाद्यान्न उत्पादन लगभग 50 मिलियन टन था, जो बढ़कर 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन लगभग 74 मिलियन टन बताया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने खेतों की मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए दलहनी फसलों, ढैंचा और हरी खाद को खेती में शामिल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने चेताया कि मिट्टी के स्वास्थ्य की अनदेखी से धीरे-धीरे खेती की जमीन बंजर हो सकती है। प्रमुख सचिव ने बताया कि मिट्टी में कार्बन की मात्रा से जुड़े विषय पर दिसंबर में लखनऊ में कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिससे वैज्ञानिकों, शोध विद्यार्थियों और किसानों को लाभ मिल सकेगा।