रविकांत (राष्ट्रीय अध्यक्ष शोषित क्रांति दल)
मेरठ। शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने मेरठ पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ कथित मारपीट तथा अमानवीय व्यवहार के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है। रविकांत ने इस घटना को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत की प्रति राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
शिकायत में रविकांत ने कहा है कि संगठन के मीडिया एवं इंटरनेट मीडिया के माध्यम से उन्हें 19 अगस्त 2026 की कथित घटना की जानकारी मिली। शिकायत के मुताबिक, उसी दिन सुबह करीब 11:30 बजे डॉ. दिग्विजय भाटी, निवासी हसनपुर, अमरोहा और मोहित जाटव, निवासी किना नगर, भावनपुर, अपनी फरियाद लेकर एसएसपी मेरठ कार्यालय पहुंचे थे।
रविकांत के अनुसार, दोनों नेताओं का आरोप है कि तत्कालीन एसएसपी मेरठ अविनाश पांडे उन्हें जनता के सामने कथित रूप से घसीटते हुए अपने निजी कक्ष में ले गए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वहां उनके साथ लात-घूंसों, कोहनी और जूते से मारपीट की गई। दिग्विजय भाटी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित मारपीट के दौरान उनकी आंख में गंभीर चोट पहुंचाई गई।
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि इसके बाद दोनों का मुंह ढककर मेरठ पुलिस लाइन स्थित किसी कार्यालय में ले जाया गया, जहां सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ सहित अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किया गया। इन आरोपों को रविकांत ने बेहद गंभीर बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
रविकांत ने अपने आरोपों में 8 जुलाई को हुई एक अन्य कथित घटना का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि उस दौरान निहत्थे लोगों पर कथित रूप से थप्पड़ और लाठीचार्ज किया गया तथा पुलिस वाहन में बंद एक व्यक्ति के साथ भी कथित तौर पर मारपीट की गई। रविकांत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों द्वारा इस प्रकार की कथित कार्रवाई की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर मानवाधिकार मामला होगा। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारियों से कानून और मानवाधिकारों के अनुरूप आचरण की अपेक्षा की जाती है और किसी भी व्यक्ति के साथ कथित दुर्व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रविकांत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि पूरे मामले की जांच डीजी इन्वेस्टिगेशन की अध्यक्षता में विशेष जांच दल गठित कर कराई जाए। उन्होंने कथित घटना में शामिल अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ संबंधित पुलिस अधिकारियों के चिकित्सकीय परीक्षण की भी मांग रखी है।
उन्होंने कहा कि शिकायत के माध्यम से आयोग से मामले का संज्ञान लेकर तथ्यों की स्वतंत्र जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। साथ ही शिकायत की प्रतियां राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भेजकर मामले में आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की गई है।