बेसहारा पशुओं के प्रबंधन हेतु जारी मानक संचालन प्रक्रिया
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की नई पहल
देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने कड़े निर्देश दिए हैं। इन आदेशों का अनुपालन करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर सभी राज्यों को भेजी है। इस एसओपी का मुख्य उद्देश्य हाईवे से बेसहारा पशुओं को सुरक्षित हटाना, दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना और जिम्मेदार एजेंसियों व स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय करना है।
NHAI और परिचालन एजेंसियों की जिम्मेदारी
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और नेशनल हाईवे के संचालन व रखरखाव से जुड़ी एजेंसियों को मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाईवे पर बेसहारा पशुओं के दिखाई देने पर उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ हटाने, पशु बाड़ा या गौशाला तक पहुंचाने और उनके परिवहन का पूरा खर्च वहन करने का जिम्मा इन्हीं एजेंसियों का होगा। रूट पेट्रोल वाहनों और एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के माध्यम से हाईवे की 24 घंटे निगरानी की जाएगी।
राज्य और जिला प्रशासन की भूमिका: 100 किमी पर बनेंगे आश्रय स्थल
एसओपी के तहत राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को प्रति 100 किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक आश्रय स्थल, पशु बाड़ा या गौशाला स्थापित व संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन संवेदनशील इलाकों या ब्लैक स्पॉट्स पर पशुओं की आवाजाही अधिक पाई जाएगी, वहां हर 50 किलोमीटर के दायरे में आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। राज्य सरकारें पशुओं के परिवहन भाड़े की दर तय करेंगी, जिसका भुगतान एनएच की संबंधित एजेंसियां करेंगी। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन पशु मालिकों की पहचान कर राज्य के नियमानुसार उन पर जुर्माना भी लगाएगा।
PM गति-शक्ति प्लेटफॉर्म पर मैपिंग और हॉटस्पॉट चिह्नांकन
हाईवे के जिन खंडों पर बेसहारा पशु सबसे ज्यादा पाए जाते हैं, उन स्थानों का चिह्नांकन कर ‘पीएम गति-शक्ति प्लेटफॉर्म’ पर मैपिंग की जाएगी। फील्ड ऑफिसर स्थान, समय और पशुओं के प्रकार के आधार पर हॉटस्पॉट चिन्हित करेंगे। इन चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, बैरियर, समुचित प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी साइनेज और तार फेंसिंग (Fencing) जैसे सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। इन हॉटस्पॉट्स की समीक्षा हर छह महीने में की जाएगी।
निगरानी, समन्वय और राज्य स्तरीय नोडल अथॉरिटी
नीतिगत समन्वय और सुचारू कार्यान्वयन के लिए राज्यों को ‘स्टेट लेवल नोडल अथॉरिटी’ का गठन करना होगा, जो सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और NHAI के साथ निरंतर संपर्क में रहेगी। इसके अलावा, एनएच एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और जिला हाईवे सुरक्षा टास्क फोर्स के बीच हर महीने समन्वय बैठकें आयोजित की जाएंगी। वहीं, सभी राज्यों को अपने-अपने आश्रय स्थलों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।