आचार्य दक्षता प्रशिक्षण वर्ग में सहभागी सदस्य
मेरठ। शास्त्री नगर स्थित बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित 10 दिवसीय आचार्य दक्षता प्रशिक्षण वर्ग का गुरुवार को भव्य समापन हो गया। एक जून से प्रारंभ हुए इस प्रशिक्षण वर्ग में पश्चिम उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्या भारती विद्यालयों से आए आचार्यों ने भाग लेकर शैक्षणिक दक्षता, नैतिक शिक्षा, विद्यालय प्रबंधन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में विद्या भारती पश्चिम उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री प्रदीप गुप्ता उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का वास्तविक लाभ विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव और शिक्षण विधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और शैक्षणिक उन्नति में सहायक बनती हैं, तभी यह प्रशिक्षण और प्रतिभागियों का परिश्रम सार्थक माना जाएगा।
प्रदीप गुप्ता ने कहा कि आचार्य केवल विषय ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके हाथों में देश के भविष्य का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों का निर्माण करना है जो विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि संस्कार, नैतिक मूल्य और राष्ट्रभक्ति की भावना भी प्रदान करें।
उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई नई तकनीकों और शिक्षण विधियों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करना प्रत्येक आचार्य का दायित्व है। प्रारंभिक शिक्षा को व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था में दिए गए संस्कार और शिक्षा ही आगे चलकर एक आदर्श नागरिक का निर्माण करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से सतत अध्ययन, अभ्यास और नवाचार को अपने शिक्षण जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
नई शिक्षा नीति और बाल केंद्रित शिक्षण पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण वर्ग के दौरान प्रतिभागियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, बाल केंद्रित शिक्षण पद्धति, नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा, कक्षा प्रबंधन, मूल्य आधारित शिक्षा और विद्यालय संचालन के आधुनिक सिद्धांतों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिदिन आयोजित होने वाले सत्रों में विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, समूह चर्चा, शिक्षण अभ्यास और मूल्यांकन कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को नवीन शिक्षण तकनीकों से परिचित कराना, कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें सक्षम बनाना था। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि यहां प्राप्त अनुभव उनके शिक्षण कार्य को और अधिक प्रभावशाली बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का लिया संकल्प
समापन अवसर पर उपस्थित सभी आचार्यों ने संकल्प लिया कि वे प्रशिक्षण वर्ग में प्राप्त ज्ञान और अनुभव को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करेंगे तथा शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
कार्यक्रम के अंत में भारतीय शिक्षा समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक विशोक कुमार ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया तथा प्रशिक्षण वर्ग के विधिवत समापन की घोषणा की।
अनेक शिक्षाविद् रहे उपस्थित
समापन समारोह में शिशु शिक्षा समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक मदनपाल, संभाग निरीक्षक जगवीर शर्मा, संभाग निरीक्षक उपेंद्र कुमार, अशोक जी, बालेराम बृजभूषण सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य प्रभात कुमार गुप्ता, कमला देवी सरस्वती शिशु मंदिर की प्रधानाचार्य गीता अग्रवाल, मनोहरी देवी शिशु वाटिका की प्रधानाचार्य सीमा श्रीवास्तव, पूर्व प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार शर्मा सहित अनेक शिक्षाविद् एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्ग शिक्षकों के कौशल विकास के साथ-साथ विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्या भारती द्वारा आयोजित यह आचार्य दक्षता प्रशिक्षण वर्ग पश्चिम उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षण स्तर को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।