ज्ञापन देते किसान
मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (आजाद) द्वारा प्रस्तावित “किसान अधिकार यात्रा” को प्रशासन द्वारा रोके जाने के बाद जिले में किसान राजनीति गरमा गई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण ढंग से निकाली जाने वाली यात्रा को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन ने संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया। भाकियू (आजाद) ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए प्रशासनिक कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
संगठन के अनुसार किसान अधिकार यात्रा का उद्देश्य किसानों को उनके अधिकारों, सरकारी नीतियों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करना था। यह यात्रा विभिन्न गांवों और जिलों से होकर गुजरने वाली थी, लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने इसे रोक दिया।
नितिन बालियान और शादाब चौधरी को घरों में रोके जाने का आरोप
भारतीय किसान यूनियन (आजाद) का कहना है कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नितिन बालियान के गंगानगर स्थित आवास पर सुबह से ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। इसी प्रकार संगठन के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर शादाब चौधरी के सिंघावली स्थित आवास पर भी पुलिस बल तैनात रहा और उन्हें भी बाहर जाने से रोका गया।
संगठन का आरोप है कि किसानों की आवाज दबाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने नेताओं के घरों पर पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्राप्त किया।
लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन: नितिन बालियान
भाकियू (आजाद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नितिन बालियान ने प्रशासनिक कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसानों और किसान संगठनों को शांतिपूर्ण आंदोलन या यात्रा निकालने से पहले ही घरों में नजरबंद करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि देश का किसान अपनी समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना चाहता है, लेकिन प्रशासन लगातार दबाव बनाकर आंदोलनों को रोकने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इसे किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश बताया और कहा कि संगठन ऐसी कार्रवाई का विरोध करता रहेगा।
किसानों और युवाओं की आवाज दबाने का आरोप
संगठन के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर शादाब चौधरी ने भी प्रशासन और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान यूरिया खाद की कमी, बढ़ती लागत, बिजली समस्याओं और स्मार्ट मीटर जैसी योजनाओं से परेशान हैं। जब किसान और युवा अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं तो प्रशासनिक दबाव बनाकर उन्हें रोका जाता है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन किसानों के हितों की लड़ाई आगे भी जारी रखेगा।
प्रधानमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
यात्रा को रोके जाने के बाद भारतीय किसान यूनियन (आजाद) ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।
प्रमुख मांगें
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र को बाहर रखा जाए संगठन का कहना है कि विदेशी कंपनियों के दबाव में भारतीय कृषि बाजार को नहीं खोला जाना चाहिए, क्योंकि इससे छोटे और मध्यम किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
- स्मार्ट मीटर योजना वापस ली जाए ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को हटाकर पुराने मीटर बहाल किए जाने की मांग की गई है।
- किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी संगठन ने मौसम की मार, बढ़ती लागत और आर्थिक संकट का हवाला देते हुए किसानों के पूरे कर्ज को माफ करने की मांग उठाई है।
- एमएसपी की कानूनी गारंटी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने की मांग की गई है।
- हाईटेंशन लाइनों का उचित मुआवजा किसानों के खेतों से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनों और टावरों से प्रभावित भूमि के लिए बाजार दर पर स्थायी मुआवजा देने की मांग रखी गई है।
- यूरिया खाद की पर्याप्त उपलब्धता ज्ञापन में यूरिया खाद की कमी और कालाबाजारी पर चिंता व्यक्त करते हुए समय पर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन (आजाद) ने स्पष्ट किया है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। संगठन का कहना है कि किसानों की आवाज को प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस बल के सहारे लंबे समय तक नहीं दबाया जा सकता।
किसान अधिकार यात्रा को लेकर हुई इस कार्रवाई के बाद किसान संगठनों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में किसानों की मांगों और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।