अवैध कॉलोनी की जांच के लिए मेरठ पहुंची न्यायिक आयोग की टीम
मेरठ, 29 अक्टूबर। जिले में अवैध निर्माण और अवैध आवासीय कॉलोनियों की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग गुरुवार को मेरठ पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित सात सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुधांशु धूलिया कर रहे हैं। आयोग उल्देपुर सहित मेरठ के अन्य क्षेत्रों में बनी कॉलोनियों और अवैध निर्माणों से जुड़े मामलों की पड़ताल करेगा।
उल्देपुर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 150 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित किए जाने की बात सामने आई है। इन कॉलोनियों के संबंध में मिली शिकायतों और उठाए गए सवालों का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। अब आयोग भूमि के स्वामित्व, कॉलोनियों के विकास और संबंधित विभागों की भूमिका की जांच करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर 2026 को मेरठ में अवैध निर्माणों और कॉलोनियों की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने का आदेश दिया था। अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया और जांच को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए अन्य सदस्यों को शामिल करने की अनुमति दी। पी. गुरु प्रसाद को आयोग के अध्यक्ष का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
आयोग यह पता लगाएगा कि जिन भूखंडों पर अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित हुई हैं, उनकी भूमि सरकारी है या निजी। यदि भूमि सरकारी नहीं है, तो उसके वैध स्वामियों की पहचान की जाएगी। जांच में निजी भूमि होने की स्थिति में भूमि मालिकों और खरीदारों के बीच हुए लेन-देन की प्रक्रिया भी देखी जाएगी।
जांच का एक प्रमुख पहलू मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की भूमिका भी है। आयोग यह पड़ताल करेगा कि प्राधिकरण पांच वर्ष से अधिक समय तक कथित तौर पर निष्क्रिय क्यों रहा और उसके सामने कॉलोनियां विकसित होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि कॉलोनियों के विकास में मेडा के अधिकारियों की मिलीभगत या सांठगांठ थी या नहीं और यदि ऐसा पाया जाता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
आयोग के मेरठ पहुंचने से पहले मेडा ने शहर में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। हालांकि, मेडा सचिव बृजेश सिंह ने कहा कि उन्हें आयोग के आने के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया गया है। अदालत के आदेश के तहत आयोग की कार्यवाही के लिए कोषागार में 35 लाख रुपये का बजट भी उपलब्ध कराया गया है।
आयोग की जांच से अवैध कॉलोनियों के विकास, भूमि के स्वामित्व और नियामक विभागों की कार्रवाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा।