पीपल के पेड़ की विशेष जानकारी दी, डॉ. सुमित उपाध्याय, मेरठ
मेरठ। भारत में पीपल के पेड़ को अत्यंत पवित्र और जीवनदायी माना जाता है। वर्षों से यह धारणा प्रचलित है कि पीपल का पेड़ दिन-रात यानी 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। इसी कारण धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व रहा है। हालांकि, आधुनिक विज्ञान इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानता। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार पीपल का पेड़ पर्यावरण के लिए बेहद लाभकारी है, लेकिन यह कहना कि वह चौबीसों घंटे लगातार ऑक्सीजन का उत्पादन करता है, पूरी तरह सही नहीं है।
क्या रात में भी ऑक्सीजन बनाता है पीपल?
वैज्ञानिकों के अनुसार सभी हरे पौधों की तरह पीपल का पेड़ भी प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया द्वारा ऑक्सीजन का निर्माण करता है। इस प्रक्रिया के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक होता है। दिन के समय पौधे कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को ग्रहण करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
रात के समय सूर्य का प्रकाश उपलब्ध नहीं होता, इसलिए सामान्य रूप से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक जाती है। ऐसे में पौधे श्वसन (Respiration) की प्रक्रिया के तहत ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। पीपल का पेड़ भी इसी प्राकृतिक नियम का पालन करता है।
पीपल की विशेषता क्या है?
हालांकि पीपल का पेड़ अन्य सामान्य पेड़ों की तुलना में कुछ विशेष गुण रखता है। वनस्पति विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार इसमें ऐसी जैव-रासायनिक प्रक्रियाएं पाई जाती हैं जो इसे रात के समय भी वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करने में सक्षम बनाती हैं।
इस प्रक्रिया को Crassulacean Acid Metabolism (CAM) अथवा उससे मिलती-जुलती प्रणाली से जोड़ा जाता है। इसके अंतर्गत पीपल रात में वातावरण से CO₂ को अवशोषित करके अपने ऊतकों में मैलिक एसिड (Malic Acid) के रूप में संग्रहित कर सकता है। इसके बाद दिन में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में यह संग्रहीत कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए उपयोग की जाती है।
रात में ऑक्सीजन देने की धारणा कैसे बनी?
विशेषज्ञों का मानना है कि पीपल के पेड़ के आसपास रात में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर अपेक्षाकृत कम महसूस हो सकता है, क्योंकि यह वातावरण से CO₂ को अवशोषित करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि प्राचीन काल में लोगों ने यह निष्कर्ष निकाल लिया कि पीपल रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है।
समय के साथ यह मान्यता व्यापक रूप से फैल गई और आज भी बहुत से लोग इसे पूरी तरह सत्य मानते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह निष्कर्ष सही नहीं माना जाता कि पीपल चौबीसों घंटे लगातार ऑक्सीजन का उत्पादन करता है।
पर्यावरण संरक्षण में पीपल का योगदान
भले ही पीपल 24 घंटे ऑक्सीजन न बनाता हो, लेकिन पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पेड़ बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करता है, वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करता है तथा पक्षियों और अन्य जीवों को आश्रय प्रदान करता है।
पीपल का विशाल आकार और घना छायादार स्वरूप आसपास के तापमान को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है। यही कारण है कि इसे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने वाले प्रमुख वृक्षों में गिना जाता है।
भारतीय संस्कृति में पीपल का महत्व
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में पीपल के वृक्ष को देववृक्ष माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में इसके पूजन और संरक्षण का विशेष उल्लेख मिलता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह वृक्ष पर्यावरण और मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है, इसलिए इसकी पूजा और संरक्षण की परंपरा समाज में जागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम रही है।
निष्कर्ष
पीपल का पेड़ 24 घंटे लगातार ऑक्सीजन नहीं बनाता, क्योंकि रात में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया नहीं हो पाती। फिर भी इसकी विशेष जैविक क्षमता और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की योग्यता इसे अन्य वृक्षों से अलग बनाती है। पर्यावरण संरक्षण, वायु शुद्धिकरण और जैव विविधता को बनाए रखने में पीपल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से पीपल का वृक्ष मानव समाज के लिए अमूल्य धरोहर माना जाता है
डॉ. सुमित उपाध्याय मेरठ, यूपी में स्थित एक बहुत अनुभवी ENT (कान, नाक और गले के रोग) विशेषज्ञ हैं। उन्हें 15 से 20 साल से ज़्यादा का प्रैक्टिस का अनुभव है और उन्होंने 10,000 से ज़्यादा सफल ऑपरेशन किए हैं। उन्होंने LLRM मेडिकल कॉलेज (मेरठ) से MBBS और KGMC (लखनऊ) से ENT में MS किया है।