आचार्य सौरभ सागर महाराज
वर्षायोग के अंतिम चरण में गुरु भक्ति के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु; आचार्य श्री का 13 और 14 अक्टूबर को वीर नगर मंदिर में प्रवास, 22 अक्टूबर के परोपकार दिवस की तैयारियां तेज
मेरठ । वर्षायोग के अंतिम चरण की ओर बढ़ने के साथ आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज के दर्शन और प्रवचन के लिए धर्मानुरागियों का उत्साह बढ़ रहा है। मंगलवार को प्रातः और सायंकालीन गुरु भक्ति में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की चरण वंदना की।
प्रातः 6:15 बजे आचार्य श्री का मंगल विहार श्री दिगंबर जैन मंदिर तीरगरान से श्री दिगंबर जैन मंदिर, वीर नगर के लिए हुआ। वीर नगर मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया और मंगल आरती की। यहां आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं को प्रवचन देकर आत्मस्वरूप की पहचान, कर्मों की निर्जरा और मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
संसार की वस्तुएं परिवर्तनशील, कर्म ही साथ जाते हैं: आचार्य श्री
आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जीवन केवल खाने, कमाने और सुख-सुविधाएं जुटाने के लिए नहीं मिला है। इसका वास्तविक उद्देश्य अपने आत्मस्वरूप को पहचानना, कर्मों की निर्जरा करना और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना है। उन्होंने कहा कि धन, संपत्ति, प्रतिष्ठा और परिवार होने के बावजूद मनुष्य अशांत रह सकता है, क्योंकि वह संसार की वस्तुओं को अपना मानता है, लेकिन आत्मा को पहचानने का प्रयास नहीं करता।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि संसार की प्रत्येक वस्तु परिवर्तनशील है और अंततः मनुष्य के साथ उसके कर्म ही जाते हैं। मंदिर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मंदिर केवल पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बल्कि आत्मा को जागृत करने का पवित्र स्थान है। भगवान के दर्शन करते समय उनके वीतराग स्वरूप से प्रेरणा लेकर अपने भीतर क्रोध, मान, माया और लोभ को कम करने का संकल्प लेना चाहिए।
22 अक्टूबर को मनाया जाएगा परोपकार दिवस
मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष और श्री पुष्प वर्षा योग समिति के चेयरमैन सुरेश जैन रितुराज ने बताया कि आचार्य श्री का वीर नगर दिगंबर जैन मंदिर में 13 और 14 अक्टूबर को प्रवास रहेगा। उन्होंने कहा कि 22 अक्टूबर को आचार्य श्री के जन्मदिवस के अवसर पर मनाए जाने वाले परोपकार दिवस की तैयारियां मेरठ महानगर में जोर-शोर से चल रही हैं।
कार्यक्रम में समिति के अमित जैन, श्रीकिशन जैन, सुशील जैन सहित समाज के अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।