नौचंदी पुलिस की गिरफ्त में प्रोक्सी कैंडिडेट
मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के अंतिम दिन मेरठ में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। गढ़ रोड स्थित राम सहाय इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंचे एक प्रॉक्सी कैंडिडेट को समय रहते पकड़ लिया गया। आरोपी मूल अभ्यर्थी के दस्तावेजों में फेरबदल कर परीक्षा देने की तैयारी में था, लेकिन केंद्र पर की गई सघन जांच के दौरान उसकी पोल खुल गई। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बुधवार को यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के अंतिम दिन दूसरी पाली की परीक्षा आयोजित की जा रही थी। निर्धारित समय पर अभ्यर्थियों का प्रवेश शुरू हुआ। इसी दौरान एक युवक के दस्तावेजों और पहचान को लेकर परीक्षा केंद्र पर तैनात अधिकारियों को संदेह हुआ। संदेह के आधार पर उसे रोककर गहन जांच की गई। जांच में सामने आया कि वह वास्तविक अभ्यर्थी नहीं है, बल्कि किसी अन्य उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने आया है।
पकड़े गए युवक को तत्काल नौचंदी थाने भेजा गया, जहां पूछताछ में उसने अपनी पहचान संतोष कुमार पुत्र अर्जुन बिंद निवासी गन्नीपुर, थाना हिल्सा, जनपद नालंदा (बिहार) के रूप में बताई। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि वह एटा जनपद के थाना जलेसर क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर कासिमपुर निवासी मूल अभ्यर्थी चन्द्रपाल सिंह पुत्र विजयवीर सिंह की जगह परीक्षा देने आया था।
दस्तावेजों में की गई थी हेराफेरी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने मूल अभ्यर्थी चन्द्रपाल सिंह के आधार कार्ड और एडमिट कार्ड में फोटो तथा पते से संबंधित जानकारी में फेरबदल कर अपने नाम और पहचान के अनुरूप दस्तावेज तैयार किए थे। इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे वह परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर परीक्षा देने की कोशिश कर रहा था।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सभी संदिग्ध दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। मामले की जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों और पुलिस भर्ती बोर्ड को भी उपलब्ध करा दी गई है।
बिहार से दिल्ली और फिर मेरठ पहुंचा आरोपी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि संतोष कुमार बिहार से हवाई यात्रा कर पहले दिल्ली पहुंचा था। दिल्ली पहुंचने के बाद उसने मेट्रो और फिर सराय काले खां से रैपिड रेल के माध्यम से मेरठ का सफर तय किया। मेरठ पहुंचने के बाद उसने अपने परीक्षा केंद्र की जानकारी जुटाई और गढ़ रोड क्षेत्र के एक होटल में ठहरा। वहीं से वह परीक्षा देने के लिए केंद्र पर पहुंचा था।
50 हजार रुपये में हुआ था सौदा
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि संतोष कुमार का मूल अभ्यर्थी से सीधा संपर्क नहीं था। जांच में एक संगठित गिरोह की भूमिका सामने आ रही है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रॉक्सी कैंडिडेट उपलब्ध कराने का काम करता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इसी गिरोह के माध्यम से संतोष कुमार को लगभग 50 हजार रुपये में चन्द्रपाल सिंह की जगह परीक्षा देने के लिए तैयार किया गया था।
गिरोह की तलाश में जुटी पुलिस
प्रॉक्सी कैंडिडेट पकड़े जाने के बाद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक सख्त कर दिया गया। पुलिस भर्ती परीक्षा के नोडल अधिकारी भी नौचंदी थाने पहुंचे और आरोपी से विस्तृत पूछताछ की। आरोपी के मोबाइल फोन, संपर्क सूत्रों और लेनदेन की जानकारी खंगाली जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। फर्जीवाड़े में शामिल गिरोह, मूल अभ्यर्थी तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि किसी संगठित नेटवर्क की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल
यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में प्रॉक्सी कैंडिडेट के पकड़े जाने की घटना ने परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था और नकल माफिया के सक्रिय नेटवर्क पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सघन जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन के चलते आरोपी परीक्षा कक्ष तक नहीं पहुंच पाया और समय रहते उसे पकड़ लिया गया।
फिलहाल नौचंदी थाना पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।