करवा चौथ पर आयोजित मेहंदी सेवा शिविर में हाथों पर मेहंदी लगवाने के बाद छात्राएं और शिक्षिकाएं।
मेरठ, 28 अक्टूबर 2026। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में करवा चौथ के अवसर पर मेहंदी सेवा शिविर आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की प्रेरणा और दिशा-निर्देशन में ललित कला संस्थान, राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश तथा महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में विद्यार्थियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शालिनी धामा ने किया।
शिविर में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने महिलाओं को करवा चौथ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में ऐसे आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों के कलात्मक हुनर, रचनात्मकता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि कला आत्मनिर्भरता और रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकती है।
‘लर्न टू अर्न’ के तहत विद्यार्थियों ने लगाई मेहंदी
शिविर में विश्वविद्यालय की महिला प्राध्यापकों, शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और श्रमिक महिलाओं के साथ ही परिसर के बाहर की कामकाजी तथा घरेलू महिलाओं ने भी भाग लिया। ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों ने ‘लर्न टू अर्न’ यानी ‘सीखो और कमाओ’ की भावना के साथ महिलाओं के हाथों पर सुंदर मेहंदी डिजाइन बनाए।
मेहंदी की आकृतियों में भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े रूपांकनों को शामिल किया गया। विद्यार्थियों ने शंख, कलश, करवा, अर्घ्य देती नारी, चंद्रमा और स्वस्तिक जैसे शुभ प्रतीकों को कलात्मक ढंग से उकेरा। इन डिजाइनों ने मेहंदी को शृंगार के साथ भारतीय आस्था और लोक परंपरा की अभिव्यक्ति का रूप दिया।
महिलाओं को कार्यस्थल पर मिली सुविधाजनक सेवा
त्योहार के समय बाजारों में मेहंदी लगवाने के लिए होने वाली भीड़ और लंबी प्रतीक्षा को देखते हुए शिविर में महिलाओं को कार्यस्थल पर ही मेहंदी लगवाने की सुविधा मिली। आयोजकों के अनुसार, बाजार की तुलना में कम खर्च पर यह सेवा उपलब्ध कराई गई। महिलाओं ने पहल की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और शगुन भी प्रदान किया।
इससे विद्यार्थियों को अपनी कला के जरिए आर्थिक लाभ मिला और अपने हुनर पर विश्वास बढ़ाने का अवसर मिला। शिविर ने उन्हें भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तलाशने के लिए भी प्रेरित किया।
पारंपरिक कलाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर
ललित कला संस्थान की उपनिदेशक प्रो. अलका तिवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मेहंदी केवल शृंगार का माध्यम नहीं, बल्कि समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संस्थान का उद्देश्य पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन देने के साथ विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि ‘लर्न टू अर्न’ जैसी पहल विद्यार्थियों को अपनी कला का व्यावसायिक उपयोग करना सिखाती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने कौशल के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन की ओर आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि ललित कला संस्थान, राज्य ललित कला अकादमी और महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त प्रयासों से पारंपरिक कलाओं के प्रचार-प्रसार और संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलता है।
शिविर में शामिल महिलाओं ने आयोजन की सराहना करते हुए ऐसे कार्यक्रम प्रत्येक प्रमुख भारतीय त्योहार पर प्रतिवर्ष आयोजित करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इससे पारंपरिक कलाओं को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों को अपने हुनर के जरिए आत्मनिर्भर बनने के अधिक अवसर मिलेंगे।
कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. शालिनी धामा, डॉ. पुनवासी, दीपांजलि और कृतिका का विशेष योगदान रहा। विश्वविद्यालय के प्रेस प्रवक्ता डॉ. मितेंद्र गुप्ता ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।