एसटीएफ की गिरफ्त में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोपी
मेरठ/बागपत। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) उत्तर प्रदेश को खनन विभाग की रॉयलटी में कूटरचना कर राज्य सरकार को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करने में बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ मेरठ यूनिट और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बागपत जनपद से गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से फर्जीवाड़े में प्रयुक्त लैपटॉप, मोबाइल फोन, कार और नकदी भी बरामद की गई है।
एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपी पिछले लगभग दस वर्षों से खनन विभाग की असली रॉयलटी (आईएसटीपी) में हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे थे, जिन्हें विभिन्न जनपदों में पीडब्ल्यूडी विभाग, नगर निगम और ठेकेदारों को उपलब्ध कराया जाता था। इस अवैध गतिविधि के कारण राज्य सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया।
ये आरोपी हुए गिरफ्तार
एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान नईम पुत्र इंतजार अली, तालिब पुत्र फारूख तथा फिरोज पुत्र अहमद अली निवासी ग्राम निवाड़ा, थाना बागपत, जनपद बागपत और आरिफ पुत्र जाहिद निवासी मोहल्ला बुढ़वा पीर, सिवाल खास, थाना जानी, जनपद मेरठ के रूप में हुई है।
चारों आरोपियों को मंगलवार को सुबह लगभग 11:45 बजे ग्राम निवाड़ा स्थित इंडियन नर्सिंग होम के पास से गिरफ्तार किया गया।
फर्जी रॉयलटी तैयार करने का बड़ा नेटवर्क
एसटीएफ को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि कुछ गिरोह अवैध रूप से खनन विभाग की वास्तविक रॉयलटी में बदलाव कर नकली रॉयलटी तैयार कर रहे हैं और उसे विभिन्न सरकारी विभागों एवं ठेकेदारों तक पहुंचा रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ मेरठ यूनिट बृजेश कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में टीम द्वारा अभिसूचना संकलन और निगरानी की जा रही थी।
मुखबिर की सटीक सूचना मिलने पर एसटीएफ और थाना बागपत पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
व्हाट्सएप के जरिए मिलती थी असली रॉयलटी
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उनके सहयोगी राहुल उर्फ राजा और आशुतोष उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से खनन विभाग की वास्तविक रॉयलटी (आईएसटीपी) भेजते थे। ये ऐसे दस्तावेज होते थे जिनका अभी तक किसी अन्य विभाग में उपयोग नहीं हुआ होता था।
इसके बाद आरोपी संबंधित विभागों के कर्मचारियों अथवा ठेकेदारों के निर्देशानुसार रॉयलटी में तारीख और अन्य आवश्यक विवरणों में बदलाव कर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे और उन्हें वापस भेज देते थे। इस कार्य के बदले उन्हें प्रति घन मीटर खनन पर निर्धारित रकम प्राप्त होती थी।
कई जिलों तक फैला था नेटवर्क
एसटीएफ जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क मेरठ, संभल, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद समेत कई जनपदों तक फैला हुआ था। आरोपियों के अनुसार विभिन्न विभागों से जुड़े कुछ कर्मचारी एवं ठेकेदार इस फर्जीवाड़े के माध्यम से अनुचित लाभ प्राप्त कर रहे थे।
जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह सामान हुआ बरामद
एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, चार्जर एवं माउस, एक हुंडई वैन्यू कार (यूपी-14 एफके-4978), आठ मोबाइल फोन तथा 2,430 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि गिरोह की गतिविधियों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा सकें।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ थाना कोतवाली बागपत में मुकदमा संख्या 383/2026 के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई राज्य सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले संगठित आर्थिक अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है और मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।