राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण में इनको लिया गया हिरासत में
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों समेत कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद मामले में शामिल लोगों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है और पुलिस ने कई नामजद आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है।
यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर राम जन्मभूमि थाने में दर्ज की गई है। मुकदमे में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और करुणेश पांडेय को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बाद कठोर कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसी रिपोर्ट और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 तथा धारा 3(5) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
13 जून को गठित हुई थी एसआईटी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया था। एसआईटी ने 15 जून से जांच शुरू की और 20 जून तक प्रारंभिक जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट लखनऊ भेज दी। इसके बाद रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू हुई।
विस्तृत जांच में जुटाए जाएंगे दस्तावेजी साक्ष्य
प्रारंभिक जांच में आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की संभावित भूमिका का उल्लेख किया गया है। अब पुलिस और एसआईटी विस्तृत जांच के दौरान दस्तावेजी साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य तकनीकी प्रमाण जुटाकर यह स्पष्ट करेगी कि कथित गड़बड़ी किस स्तर तक हुई और उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
पूरे नेटवर्क की होगी जांच
एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों से पूछताछ शुरू होने के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चढ़ावे की राशि, आभूषण और अन्य सामग्री में कथित अनियमितताओं का कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पीएमओ से लेकर सीएमओ तक नजर
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र होने के कारण इस मामले पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) तक की नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी जांच में “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इन वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम एफआईआर में नहीं
दर्ज एफआईआर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा तथा व्यवस्थापक गौपाल राव के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। फिलहाल पुलिस नामजद आरोपियों से पूछताछ कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।