बाएं से (प्रो डॉ योगेंद्र गौतम, प्रो वीरपाल सिंह और प्रो अनुज कुमार)
मेरठ, 30 अक्टूबर। स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीक के क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनुज कुमार की शोध परियोजना को उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएसटीयूपी), लखनऊ ने 14.86 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। परियोजना तीन वर्ष तक चलेगी।
इस परियोजना में प्रो. अनुज कुमार मुख्य अन्वेषक होंगे, जबकि प्रो. बीरपाल सिंह और डॉ. योगेंद्र कुमार गौतम सह-अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगे। परियोजना का शीर्षक ‘Development of Green and Sustainable Nano-Composite Polymer Gel Electrolytes for Next-Generation Supercapacitors’ है। इसके तहत अगली पीढ़ी के सुपरकैपेसिटर के लिए हरित और टिकाऊ नैनो-कंपोजिट पॉलिमर जेल इलेक्ट्रोलाइट विकसित करने पर शोध किया जाएगा।
सुपरकैपेसिटर में ऊर्जा संग्रहण पर होगा काम
सुपरकैपेसिटर विद्युत ऊर्जा को संग्रहित करने वाला आधुनिक उपकरण है। यह बहुत कम समय में चार्ज और डिस्चार्ज हो सकता है और बड़ी संख्या में चार्ज-डिस्चार्ज चक्रों को सहन करने की क्षमता रखता है। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसी उन्नत सामग्री तैयार करना है, जो ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को अधिक प्रभावी, स्थिर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में योगदान दे सके।
इलेक्ट्रिक वाहनों में तेजी के दौरान अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध कराने और ब्रेक लगने पर उत्पन्न ऊर्जा को फिर से संग्रहित करने में सुपरकैपेसिटर उपयोगी हो सकते हैं। सौर और पवन ऊर्जा प्रणालियों में ऊर्जा उत्पादन के उतार-चढ़ाव को संभालने तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तेजी से ऊर्जा देने में भी इनकी संभावित भूमिका है।
पॉलिमर जेल इलेक्ट्रोलाइट की विशेषताओं का अध्ययन
सुपरकैपेसिटर में इलेक्ट्रोलाइट वह माध्यम होता है, जिसमें आयन गति करते हैं और ऊर्जा संग्रहण तथा विमोचन की प्रक्रिया में मदद करते हैं। पारंपरिक प्रणालियों में तरल इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग किया जाता है। पॉलिमर जेल इलेक्ट्रोलाइट में इलेक्ट्रोलाइट को पॉलिमर की संरचना के भीतर जेल के रूप में व्यवस्थित किया जाता है। इससे रिसाव की समस्या कम करने और उपकरण की स्थिरता तथा सुरक्षा बेहतर करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
शोध में पॉलिमर के साथ नैनो स्तर के विशेष पदार्थ मिलाकर नैनो-कंपोजिट सामग्री तैयार की जाएगी। वैज्ञानिक यह जांचेंगे कि इन पदार्थों के संयोजन से सामग्री की विद्युत चालकता, तापीय स्थिरता, यांत्रिक मजबूती और आयनों के परिवहन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
ऊर्जा और पावर क्षमता का होगा मूल्यांकन
परियोजना के दौरान अलग-अलग पॉलिमर और नैनो-मटेरियल से तैयार जेल इलेक्ट्रोलाइट की विद्युत एवं इलेक्ट्रोकेमिकल विशेषताओं का परीक्षण किया जाएगा। इसमें आयनिक चालकता, चार्ज-डिस्चार्ज व्यवहार, ऊर्जा घनत्व, पावर डेंसिटी, तापीय स्थिरता और लंबे समय तक प्रदर्शन का आकलन शामिल होगा।
ऊर्जा घनत्व से पता चलता है कि कोई उपकरण अपने आकार या भार के अनुपात में कितनी ऊर्जा संग्रहित कर सकता है, जबकि पावर डेंसिटी बताती है कि वह कितनी तेजी से ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है। शोध टीम ऐसी सामग्री विकसित करने की दिशा में काम करेगी, जिसमें इन दोनों गुणों के बीच बेहतर संतुलन हो।
इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा में संभावित उपयोग
शोध के परिणाम भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर एवं पवन ऊर्जा प्रणालियों और पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी और सुपरकैपेसिटर की संयुक्त व्यवस्था से तेजी के समय ऊर्जा उपलब्ध कराने और ब्रेकिंग के दौरान ऊर्जा वापस हासिल करने में मदद मिल सकती है। नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में भी ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रबंधन की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।
इन संभावनाओं को व्यावहारिक तकनीक में बदलने के लिए प्रयोगशाला परीक्षण और आगे के अनुप्रयोग संबंधी अध्ययन आवश्यक होंगे। परियोजना का लक्ष्य ऊर्जा भंडारण के लिए नई सामग्री और उसके गुणों को समझना है।
कुलपति ने शोध टीम को दी बधाई
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने इस उपलब्धि पर शोध टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार, ऐसी परियोजनाओं से नए वैज्ञानिक विचारों को प्रयोगात्मक रूप देने और शोधार्थियों को आधुनिक तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलता है।
यह वित्तीय स्वीकृति सीसीएसयू में पदार्थ विज्ञान और ऊर्जा भंडारण तकनीक से जुड़े शोध को प्रोत्साहन देगी। साथ ही, युवा शोधार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ने और अपने शोध कौशल को विकसित करने का अवसर मिलेगा।