अंडमान की सेल्युलर जेल को स्वतंत्रता संग्राम की पाठशाला बनाने की मांग
पोर्ट ब्लेयर, अंडमान-निकोबार, 15 सितंबर। राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक एवं पूर्व मंत्री पंडित सुनील भराला ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के नवनियुक्त उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा से भेंट कर उन्हें एक महत्वपूर्ण पत्र सौंपा। पत्र के माध्यम से उन्होंने अंडमान-निकोबार को राष्ट्र-चेतना, स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारी इतिहास की राष्ट्रीय पाठशाला के रूप में विकसित करने की मांग रखी। उन्होंने विशेष रूप से देश के युवाओं को अंडमान की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने के लिए “अंडमान राष्ट्र-चेतना यात्रा” जैसी राष्ट्रीय पहल शुरू करने का सुझाव दिया।
अंडमान केवल पर्यटन स्थल नहीं, स्वतंत्रता संग्राम की अमर भूमि
पंडित सुनील भराला ने कहा कि अंडमान-निकोबार केवल समुद्र, द्वीप और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में इसका विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि इस धरती पर देश के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना किया और अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि अंडमान की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। युवाओं को केवल किताबों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में जानकारी देने के बजाय उन्हें उन ऐतिहासिक स्थलों तक ले जाना चाहिए, जहां स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष और त्याग का जीवन जिया।
सेलुलर जेल को बताया संघर्ष और बलिदान का जीवंत स्मारक
पंडित सुनील भराला ने सेलुलर जेल को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान का जीवंत स्मारक बताया। उन्होंने कहा कि सेलुलर जेल की दीवारें और कोठरियां स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े अनेक अध्यायों की गवाह रही हैं। यहां आने वाली युवा पीढ़ी स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष और बलिदान को अधिक करीब से समझ सकती है।
उन्होंने वीर विनायक दामोदर सावरकर सहित स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े क्रांतिकारियों के जीवन और उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इन अध्यायों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना केवल इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना को मजबूत करना भी है।
हर युवा को अंडमान की राष्ट्र-चेतना यात्रा से जोड़ने का सुझाव
उपराज्यपाल को सौंपे पत्र में पंडित सुनील भराला ने सुझाव दिया कि देश के विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों और युवाओं को अंडमान की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने के लिए “अंडमान राष्ट्र-चेतना यात्रा” जैसी राष्ट्रीय पहल शुरू की जाए। इसके तहत देशभर के विद्यार्थियों और युवाओं को अंडमान लाकर सेलुलर जेल सहित स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि देश का युवा अंडमान आकर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से जुड़े स्थानों को देखेगा तो उसे स्वतंत्रता की कीमत और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को समझने का अवसर मिलेगा।
पंडित सुनील भराला ने कहा कि देश का हर युवा अंडमान आए, सेलुलर जेल को देखे, क्रांतिकारियों के इतिहास को जाने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लेकर वापस लौटे। उनके अनुसार यह अनुभव युवा पीढ़ी के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायी साबित हो सकता है।
अंडमान को राष्ट्र-चेतना का वैश्विक केंद्र बनाने की मांग
पंडित सुनील भराला ने कहा कि अंडमान-निकोबार को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के साथ-साथ इसे राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम के अध्ययन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए कई स्तरों पर कार्य करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि अंडमान में स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित राष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय, क्रांतिकारी इतिहास शोध केंद्र, युवा राष्ट्र-चेतना प्रशिक्षण कार्यक्रम, डॉक्यूमेंट्री एवं डिजिटल आर्काइव और नियमित राष्ट्रीय संगोष्ठियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक यात्राओं पर जोर
पंडित सुनील भराला ने विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक यात्राएं आयोजित करने की भी मांग की। उनका कहना है कि अंडमान के ऐतिहासिक स्थलों को देश के शैक्षणिक और युवा कार्यक्रमों से जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसी यात्राओं के माध्यम से विद्यार्थियों को इतिहास की जानकारी के साथ-साथ देश के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को समझने का अवसर मिलेगा। इससे युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
सेलुलर जेल पहुंचकर क्रांतिकारियों को किया नमन
पंडित सुनील भराला ने सेलुलर जेल पहुंचकर वीर सावरकर और स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात-अज्ञात क्रांतिकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के इतिहास को केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय युवाओं को उन ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचाना आवश्यक है, जहां देश के वीरों ने अपने जीवन का कठिन समय राष्ट्र के लिए समर्पित किया।
नवनियुक्त उपराज्यपाल से व्यापक कार्ययोजना बनाने की अपील
पंडित सुनील भराला ने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा के मार्गदर्शन में अंडमान-निकोबार में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी स्मृतियों और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में नए प्रयास किए जा सकते हैं।
उन्होंने अंडमान-निकोबार प्रशासन से राष्ट्र-चेतना एवं स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने और देशभर के युवाओं को इससे जोड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अंडमान की धरती राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का संदेश देती है और आवश्यकता इस बात की है कि इस संदेश को देश के प्रत्येक युवा तक पहुंचाया जाए। उनके अनुसार अंडमान को राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों से जोड़कर विकसित करने से देश की युवा पीढ़ी को इतिहास और राष्ट्रनिर्माण के प्रति नई प्रेरणा मिल सकती है।