प्रेस वार्ता कर मानव अधिकार प्रशिक्षण की जानकारी देते आयोजक मंडल के सदस्य
मेरठ। मानवाधिकारों के प्रति विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में 9 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली के तत्वावधान में विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान में आयोजित होगा। कार्यक्रम की तैयारियों और आयोजन से संबंधित जानकारी देने के लिए 7 सितंबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें विधि अध्ययन संस्थान के समन्वयक डॉ. विवेक कुमार ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा प्रायोजित है प्रशिक्षण कार्यक्रम
विधि अध्ययन संस्थान के समन्वयक डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित किया गया है। आयोग की ओर से देशभर में मानवाधिकार शिक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों, आम नागरिकों और विभिन्न संस्थानों को मानवाधिकारों के संरक्षण से जुड़े संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों की जानकारी उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को देश में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए स्थापित विभिन्न संस्थानों की कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सहित समाज के विभिन्न महत्वपूर्ण वर्गों के अधिकारों और उनके संरक्षण से संबंधित विषयों पर जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
देश के 22 संस्थानों में CCSU के विधि अध्ययन संस्थान का चयन
कार्यक्रम संयोजक आशीष कौशिक ने बताया कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की वित्तीय वर्ष 2026-27 की मानवाधिकार शिक्षा एवं जागरूकता योजना के अंतर्गत देशभर से केवल 22 संस्थानों का चयन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए किया गया है। इनमें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान को उत्तर प्रदेश के एकमात्र शैक्षणिक संस्थान के रूप में इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चयनित किया गया है।
उन्होंने बताया कि यह विश्वविद्यालय और विशेष रूप से विधि अध्ययन संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कार्यक्रम में अब तक 200 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा पंजीकरण कराया जा चुका है। प्रशिक्षण के दौरान मानवाधिकार शिक्षा एवं जागरूकता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान करेंगे।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला करेंगी कार्यक्रम की अध्यक्षता
राष्ट्रीय मानवाधिकार प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला करेंगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली के प्रेजेंटिंग ऑफिसर श्री अंजनी अनुज होंगे। विश्वविद्यालय स्तर पर कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी की जा रही हैं और विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को मानवाधिकारों के अलग-अलग पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
चार प्रशिक्षण सत्रों में मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर होगी चर्चा
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के बाद मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चार प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा संवैधानिक अधिकारों, मानवाधिकार संस्थानों, महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों तथा बंधुआ मजदूरी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
मानवाधिकार और भारतीय संविधान के प्रावधानों पर होगा मंथन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के एक प्रमुख सत्र में मानवाधिकारों और भारतीय संविधान में दिए गए संवैधानिक प्रावधानों पर चर्चा होगी। इसमें नागरिकों के मूल अधिकारों तथा मानवाधिकारों के संरक्षण में संविधान की भूमिका को समझाया जाएगा। प्रतिभागियों को यह जानकारी दी जाएगी कि संवैधानिक व्यवस्था किस प्रकार नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का आधार तैयार करती है।
भारत के मानवाधिकार संस्थानों की कार्यप्रणाली की दी जाएगी जानकारी
दूसरे प्रशिक्षण सत्र में भारत में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए स्थापित विभिन्न संस्थानों पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान प्रतिभागियों को मानवाधिकार संरक्षण से जुड़ी संस्थागत व्यवस्था, शिकायतों के निवारण और संबंधित संस्थानों की भूमिका के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को मानवाधिकार संरक्षण की मौजूदा व्यवस्था से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना है।
महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर विशेष जोर
कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों के मानवाधिकारों को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। इस सत्र में महिलाओं एवं बच्चों के संरक्षण से संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों पर चर्चा होगी। साथ ही उनके अधिकारों के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और समाज में संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
बंधुआ मजदूरी की रोकथाम और कानूनी संरक्षण पर चर्चा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बंधुआ मजदूरी से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी। प्रतिभागियों को बंधुआ मजदूरी की रोकथाम, प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों तथा उन्हें उपलब्ध कानूनी संरक्षण के बारे में बताया जाएगा। इस विषय के माध्यम से मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े सामाजिक और कानूनी पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर भी विशेष चर्चा
कार्यक्रम में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जुड़े अधिकारों और कानूनी प्रावधानों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। विशेषज्ञों द्वारा इन वर्गों के अधिकारों के संरक्षण के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्था तथा सामाजिक संवेदनशीलता की आवश्यकता पर जानकारी दी जाएगी। आयोजकों के अनुसार, मानवाधिकार शिक्षा का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकारों के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना विकसित करना है।
मानवाधिकार जागरूकता से मजबूत होगा समाज
आयोजकों का कहना है कि मानवाधिकारों की जानकारी केवल कानून और संविधान तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह एक जागरूक और संवेदनशील समाज के निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरे व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति भी सजग होते हैं, तब समाज में समानता, सम्मान और न्याय की भावना मजबूत होती है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों को मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान करेगा। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम मानवाधिकार शिक्षा एवं जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और प्रतिभागियों को अपने अधिकारों तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएगा।
प्रेसवार्ता में ये रहे मौजूद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. सुदेशना, डॉ. अपेक्षा चौधरी, डॉ. विकास राठी, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. धनपाल सिंह, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. कुसुमवती सहित अन्य शिक्षक एवं संबंधित लोग मौजूद रहे।