अवधेश कुमार त्यागी
मेरठ/गाजियाबाद। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) मेरठ सेक्टर की टीम ने करोड़ों रुपये की बैंक धोखाधड़ी के एक चर्चित मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पैनल अधिवक्ता अवधेश कुमार त्यागी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अधिवक्ता ने बैंक अधिकारियों को गुमराह करते हुए कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर अनुकूल लीगल रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके चलते 2.80 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हो गया और बैंक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर के पुलिस अधीक्षक डॉ. राजीव दीक्षित ने बताया कि यह मामला वर्ष 2018 का है। इस संबंध में कमिश्नरेट गाजियाबाद के थाना नगर कोतवाली में मुकदमा अपराध संख्या 988/2018 के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, कूट रचना तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। वर्ष 2020 में इस मुकदमे की विवेचना ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर को सौंप दी गई थी।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे लिया गया था करोड़ों का ऋण
जांच के दौरान सामने आया कि यशदेव जैन नामक व्यक्ति ने अपनी फर्म पी डी ट्रेडर्स के नाम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की राइट गंज शाखा, गाजियाबाद में 2.80 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। ऋण के लिए रामकिशोर वर्मा की संपत्ति को गारंटी और बंधक के रूप में प्रस्तुत किया गया। बैंक द्वारा ऋण स्वीकृत होने के बाद पूरी धनराशि फर्म के खाते में स्थानांतरित कर दी गई।
हालांकि बाद में जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिस संपत्ति को बैंक के समक्ष बंधक के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वह पहले से ही एडी एसोसिएट्स के नाम पर यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की विकासपुरी शाहदरा, दिल्ली शाखा में गिरवी रखी जा चुकी थी। उस संपत्ति के आधार पर पहले ही लगभग चार करोड़ रुपये का ऋण लिया जा चुका था।
पैनल अधिवक्ता की भूमिका संदिग्ध पाई गई
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के पैनल अधिवक्ता अवधेश कुमार त्यागी ने ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरोप है कि उन्होंने मूल दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना केवल द्वितीय प्रति (कॉपी) के आधार पर संपत्ति को वैध मानते हुए सकारात्मक लीगल रिपोर्ट बैंक को उपलब्ध करा दी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यदि संपत्ति के मूल दस्तावेजों की विधिवत जांच की जाती तो यह तथ्य सामने आ जाता कि उक्त संपत्ति पहले से ही किसी अन्य बैंक में बंधक रखी जा चुकी है। अधिवक्ता की रिपोर्ट के आधार पर ही बैंक ने ऋण स्वीकृत किया, जिससे बैंक को करोड़ों रुपये की वित्तीय क्षति हुई।
मिलीभगत कर धोखाधड़ी का आरोप
ईओडब्ल्यू का कहना है कि जांच में अधिवक्ता अवधेश कुमार त्यागी की भूमिका केवल लापरवाही तक सीमित नहीं पाई गई, बल्कि अभियुक्त यशदेव जैन और रामकिशोर वर्मा के साथ उनकी कथित मिलीभगत के भी साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी की गई है।
आरोपी को गाजियाबाद पुलिस को सौंपा गया
एसपी ईओडब्ल्यू डॉ. राजीव दीक्षित ने बताया कि आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद गिरफ्तार अधिवक्ता को आगे की कार्यवाही के लिए गाजियाबाद पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और बैंक धोखाधड़ी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है।
बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस मामले ने बैंकों में ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, संपत्तियों के सत्यापन और पैनल अधिवक्ताओं की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दस्तावेजों का गहन सत्यापन किया जाता तो करोड़ों रुपये की इस धोखाधड़ी को रोका जा सकता था। ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।