एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज के द्वारा जारी किया गया खंडन पोस्टर
मुरादाबाद। हाल के दिनों में कुछ मीडिया माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर महावीर यूनिवर्सिटी एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) धर्मेंद्र भारद्वाज के संबंध में प्रसारित की जा रही खबरों को लेकर आधिकारिक रूप से स्पष्टीकरण जारी किया गया है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा महावीर यूनिवर्सिटी अथवा माननीय एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज से संबंधित किसी भी परिसर पर छापेमारी किए जाने संबंधी दावे पूरी तरह असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि महावीर यूनिवर्सिटी अथवा धर्मेंद्र भारद्वाज से जुड़े किसी भी संस्थान, परिसर या प्रतिष्ठान पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कोई कार्रवाई या छापेमारी नहीं की गई है। साथ ही ऐसी किसी कार्रवाई की कोई आधिकारिक पुष्टि भी किसी सक्षम एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।
प्रशासनिक स्तर पर भी नहीं हुई किसी कार्रवाई की पुष्टि
विज्ञप्ति में कहा गया है कि सामान्यतः जब प्रवर्तन निदेशालय किसी संस्थान, संगठन या प्रतिष्ठान पर छापेमारी अथवा महत्वपूर्ण कार्रवाई करता है, तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी होती है तथा संबंधित अभिलेखों में भी इसका उल्लेख दर्ज किया जाता है। लेकिन वर्तमान मामले में स्थानीय प्रशासनिक अथवा पुलिस स्तर पर ऐसी किसी कार्रवाई की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार महावीर यूनिवर्सिटी या धर्मेंद्र भारद्वाज से जुड़े किसी भी परिसर पर ईडी की कार्रवाई की सूचना न तो प्रशासनिक रिकॉर्ड में है और न ही किसी आधिकारिक स्रोत द्वारा इसकी पुष्टि की गई है।
महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मामलों को जोड़कर फैलाया जा रहा भ्रम
जारी बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से संबंधित मामलों को महावीर यूनिवर्सिटी और एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज के साथ जोड़कर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञप्ति के अनुसार धर्मेंद्र भारद्वाज का महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रबंधन, संचालन अथवा प्रशासनिक गतिविधियों से किसी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। ऐसे में उनके नाम को उक्त मामलों से जोड़ना पूरी तरह अनुचित और तथ्यों के विपरीत बताया गया है।
अपुष्ट खबरों से जनमानस को किया जा रहा गुमराह
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बिना किसी तथ्यात्मक आधार के किसी व्यक्ति अथवा संस्थान का नाम विवादित मामलों से जोड़ना न केवल भ्रामक है बल्कि इससे समाज में भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न होती है। इस प्रकार की अपुष्ट और आधारहीन खबरें जनमानस को गुमराह करने का कार्य करती हैं तथा जिम्मेदार पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के भी विपरीत हैं।
मीडिया संस्थानों और आमजन से की गई अपील
विज्ञप्ति के अंत में मीडिया संस्थानों, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी समाचार या सूचना को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता और आधिकारिक पुष्टि अवश्य सुनिश्चित करें। साथ ही अपुष्ट, भ्रामक और तथ्यहीन सूचनाओं के प्रसार से बचने का आग्रह किया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि केवल सत्यापित और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन एवं प्रसारण किया जाना चाहिए, ताकि समाज में भ्रम और गलतफहमियों की स्थिति उत्पन्न न हो।